सिंहपुर के उसरहा गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद
अमेठी सिटी। मन, तन और बुद्धि को पवित्र रखने के लिए कथा का आयोजन और श्रवण अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। सत्संग से जुड़कर भक्ति मार्ग अपनाने वाला व्यक्ति अपने पथ पर स्थिर रहता है। ये बातें सिंहपुर के उसरहा गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या कालिका धाम पीठाधीश्वर प्रवाचक डॉ. शैलेंद्राचार्य महाराज ने शनिवार को कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कृष्ण भगवान की वाणी का स्वरूप है। इसमें पुराण, वेद और शास्त्रों का सार निहित है। श्रीमद्भागवत श्रवण मन को शुद्ध करने का सरल और प्रभावी मार्ग माना गया है। सद्कर्म से ही कथा सुनने की प्रेरणा जागृत होती है। उन्होंने कहा कि कथा के श्रवण से मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति के साथ मृत्यु के भय से मुक्त होता है, इस कारण मानव जीवन में इसका विशेष स्थान है।
प्रवाचक ने राजा परीक्षित और आचार्य शुकदेव के संवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने से मृत्यु की सूचना मिली तो उन्होंने शुकदेव मुनि की शरण ली और जीवन से मुक्ति का मार्ग पूछा। शुकदेव ने स्पष्ट किया कि सात दिन में मृत्यु निश्चित है, मगर श्रीमद्भागवत श्रवण से मृत्यु का भय समाप्त हो जाएगा और मुक्ति का मार्ग खुल जाएगा। इस अवसर पर बब्बू तिवारी, दीपू शुक्ला, अमरेश तिवारी, बृजेश तिवारी, मो. मासूम, प्रदीप तिवारी, करुणेश अग्निहोत्री, तुषार त्रिवेदी, संतोष दुबे, अविनाश शर्मा आदि मौजूद रहे।