जामों (अमेठी)। मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी। सच्चा दोस्त वही है जो मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए मदद कर दे। कलयुग में केवल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध होता है, तभी तक मित्रता रहती है। ये बातें ब्लाॅक क्षेत्र के सूखीबाजगढ़ के पूरे सिंह मिश्र गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक पंडित पंकज कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि मोक्ष की कामना प्रत्येक मनुष्य करता है, लेकिन सभी को सही राह नहीं मिलती है। भागवत कथा एक ऐसा मार्ग है जो प्रत्येक को मोक्ष की ओर ले जाता है। प्रभु कृपा से मिले इस जीवन को सही ढंग से जीना चाहिए। इंसान दुनिया में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है।
उसे उसके कर्मों के अनुसार याद किया जाता है। मनुष्य को चाहिए कि छल-कपट और सांसारिक मोह माया में फंसने के बजाय वह हरि चरणों में ध्यान लगाते हुए परोपकार करे। इस अवसर पर मुख्य यजमान अशोक मिश्र, करुणा शंकर मिश्र, अंबिका प्रसाद तिवारी, मनीष कुमार, आशीष कुमार, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।