संग्रामपुर के गूजीपुर गांव में पौधों की सिंचाई करते बृजेश प्रताप सिंह।-संवाद
अमेठी सिटी। बदलते मौसम और घटती हरियाली के बीच अमेठी में पर्यावरण प्रेमी प्रकृति को बचाने की अनोखी मुहिम चला रहे हैं। कुछ लोगों ने अपने घरों को नर्सरी में बदल दिया है। वे हजारों पौधे तैयार कर सार्वजनिक स्थानों को हरा-भरा बना रहे हैं। इंदिरा गांधी डिग्री कॉलेज के बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. लालता प्रसाद द्विवेदी अगम अब तक दो हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। उनका कहना है कि पौधे लगाना आसान है, लेकिन उन्हें पेड़ बनने तक संरक्षित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
संग्रामपुर के गूजीपुर गांव निवासी बृजेश प्रताप सिंह ने पर्यावरण संरक्षण को अपना मिशन बना लिया है। उन्होंने स्वयं नर्सरी तैयार कर करीब तीन हजार पौधे विकसित किए हैं। रेलवे स्टेशन, विद्यालयों, नदी-नालों के किनारे और खाली पड़ी भूमि पर पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक पौधा भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है।
वहीं पीथीपुरी गांव के सेवानिवृत्त आर्मी कैप्टन ज्वाला प्रसाद ओझा ने अपने घर को मिनी नर्सरी का रूप दे दिया है। सुबह का अधिकांश समय पौधों की सिंचाई और देखभाल में बीतता है। वह विभिन्न स्थानों से पौधे लाकर उन्हें तैयार करते हैं और खाली भूमि पर रोपित करते हैं।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी जरूरी है। जिले में इस वर्ष व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। (संवाद)