अमेठी। बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अधिवक्ता उपेंद्र शुक्ल पर करीब सात लाख रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। बार एसोसिएशन की बैठक में पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, कथित गबन की राशि की रिकवरी कराने और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को अधिवक्ता पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति भेजने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। दूसरी ओर पूर्व सचिव ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश करार दिया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सचिव अनिल कुमार तिवारी ने जांच समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में करीब सात लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पूर्व सचिव ने अपने कार्यकाल में बार एसोसिएशन की राशि का दुरुपयोग किया और वित्तीय अभिलेखों का समुचित रखरखाव नहीं किया।
साथ ही बार काउंसिल के नियमों के अनुरूप वार्षिक बजट भी प्रस्तुत नहीं किया गया। बैठक में उपेंद्र शुक्ल की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने तथा कोतवाली में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्णय लिया गया। सचिव अनिल कुमार तिवारी ने बताया कि यह फैसला बार एसोसिएशन के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
वहीं पूर्व सचिव उपेंद्र शुक्ल ने कहा कि उन्होंने करीब 10 माह पहले विधिवत कार्यभार सौंप दिया था। उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। वह बार काउंसिल में अपना पक्ष रखेंगे और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।