फुरसतगंज (अमेठी)। फुटवियर डिजाइनिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) से पास होकर निकले होनहार देश के साथ ही विदेश में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। संस्थान से पास हुए करीब दो हजार विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में सफल उद्यमी के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह खुद रोजगार करने के साथ ही दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। कंपनियों में यहां के विद्यार्थियों को 20 से 25 लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया जा रहा है।
एफडीडीआई की स्थापना भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने वर्ष 2008 में की गई थी। लगभग 16 वर्षों में संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र प्रशिक्षण के बाद देश के नामी संस्थानों में नौकरी कर रहे हैं। वहीं कई विद्यार्थी संस्थानों से नौकरी छोड़कर खुद की कंपनी भी संचालित कर रहे हैं।
एफडीडीआई के परीक्षा प्रभारी डॉ. नलिन पांडेय ने बताया कि संस्थान में योग्य प्रोफेशनल्स को तैयार किया जा रहा है, जो देश-दुनिया की प्रमुख फुटवियर कंपनियों में अपनी धाक जमा रहे हैं। संस्थान की ओर से फुटवियर व फैशन के क्षेत्र में नई तकनीक से परिचित कराया जा रहा है।
दुबई में कार्य कर रहे आतिफ
संस्थान से वर्ष 2018 में फुटवेयर डिजाइन की डिग्री लेने के बाद संस्थान के छात्र आतिफ सिद्दीकी जो कानपुर के रहने वाले हैं, अब दुबई की एक विदेशी अपैरल कंपनी में सीनियर बायर (वरिष्ठ विपणन अधिकारी) फुटवेयर के पद पर कार्य कर सालाना 20 लाख रुपये का पैकेज लेकर देश व संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं।
दोहा में वरिष्ठ प्रबंधक की निभा रहे जिम्मेदारी
संस्थान से वर्ष 2010 में फुटवेयर रिटेल की डिग्री लेने के बाद रायबरेली के अनिरुद्ध सिंह जो आज दोहा में एक विदेशी कंपनी यार्कर के वरिष्ठ मैनेजर के पद पर कार्य कर सालाना 25 लाख का पैकेज लेकर अपने परिवार व जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
कंपनी बना दिया रोजगार
संस्थान से वर्ष 2016 में फुटवेयर की डिग्री लेने के बाद कानपुर के सुजल प्रताप सिंह ने चीन की कंपनी में कुछ दिन काम करने के बाद 2019 गुरुग्राम में कैको फाई कंपनी की स्थापना की, जिसमें आज बड़ी संख्या में युवा कार्य कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
फुटवियर कंपनी में कर रहे डिजाइनिंग
संस्थान से वर्ष 2022 में फुटवेयर की डिग्री लेने के बाद रायबरेली के नमन अग्रवाल जो आज बंगलूरू की डी कैथलॉन कंपनी में डिजाइनर के रूप में कार्य कर कर रहे हैं।