गौरीगंज (अमेठी)। पांच एजेंसियों के 52 क्रय केंद्रों पर हाईब्रिड धान बेच पाना किसानों के लिए इस सीजन में टेढ़ी खीर साबित होगी। शासन की ओर से जारी खरीद नीति में हाईब्रिड धान बेचने के लिए खरीद का रिकार्ड जमा करना अनिवार्य किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में बीज खरीद का रिकार्ड नहीं होने से उत्पादित हाईब्रिड धान उन्हें मजबूरी में बाजारों में औने-पौने दाम पर बेचना पड़ेगा।
फसल समर्थन मूल्य योजना के तहत जिले में पांच एजेंसी के 52 क्रय केद्रों पर एक नवंबर से औपचारिक खरीद शुरू हो चुकी है। चार दिन बीत जाने के बावजूद सिर्फ विपणन शाखा के गौरीगंज व अमेठी क्रय केंद्र पर ही बोहनी हुई है तो 50 क्रय केंद्र अभी किसानों का इंतजार कर रहे हैं। नवंबर की शुरुआत में सिर्फ हाईब्रिड धान समेत अगैती प्रजाति ही तैयार होने से पहले क्रय केंद्रों पर इन्हीं धान की प्रजाति लेकर किसान बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन शासन की ओर से जारी खरीद नीति ने हाईब्रिड धान उत्पादित किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
आदेश के मुताबिक किसानों को क्रय केंद्रों पर अपने हाईब्रिड धान बेचने के लिए पंजीकरण के बाद बीज खरीद का रिकॉर्ड, उसका खरीद बिल आदि लेकर जाना अनिवार्य है। अधिकांश दुकानदारों की ओर से बीज क्रय करने पर बिल देने की व्यवस्था जिले में कागजों पर ही प्रभावी होने से बिल नहीं है।
यदि किसी किसान ने बीज खरीदते समय बिल लिया भी होगा तो चार-पांच माह बाद बिल को सुरक्षित रखना उनके लिए मुश्किल ही है। यदि किसानों को पहले पता होता कि हाईब्रिड धान बिक्री के समय बिल की जरूरत पड़ेगी तो शायद बिल रखते भी। ऐसे में बहुत संभव है कि किसानों को औने-पौने दामों पर बाजार में उत्पादित हाईब्रिड धान की बिक्री करनी पड़ेगी।
डिप्टी आरएमओ संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि खरीद नीति के अनुसार हाईब्रिड धान बेचने के लिए किसानों को बीज खरीद का प्रमाण केंद्र पर लाना अनिवार्य है। बीज खरीद रिकार्ड में रसीद, कैश मेमो को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त एक प्रमाण पत्र भी किसान को देना होगा, जिसमें बीज खरीद की मात्रा, उत्पादित क्षेत्र व उत्पादन की मात्रा का उल्लेख करना होगा। डिप्टी आरएमओ ने किसानों से पंजीकरण के बाद हाईब्रिड धान होने पर खरीद रिकार्ड लाने की अपील की है।