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निरस्त हो सकता है एनएच के भूमि अधिग्रहण का अवार्ड

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गौरीगंज (अमेठी)। एनएच-56 के दो बाईपास निर्माण के लिए जमीनों के मुआवजा निर्धारण में अफसरों द्वारा 384 करोड़ रुपये लुटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जांच में मामले की पुष्टि होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट किसानों को नोटिस जारी करने की तैयारी में है। नोटिस के बाद किसानों द्वारा जवाब नहीं देने या जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में जिला मजिस्ट्रेेट की कोर्ट अवार्ड निरस्त करने के साथ किसानों से रिकवरी का आदेश भी जारी कर सकती है।
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केंद्र की संप्रग सरकार ने वर्ष 2013-14 में लखनऊ से वाराणसी वाया सुल्तानपुर (एनएच-56) राष्ट्रीय राजमार्ग को टू लेन से फोर लेन किए जाने को मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद एनएचएआई ने जिले के जगदीशपुर व मुसाफिरखाना कस्बे में बाईपास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण कराने का अनुरोध जिला प्रशासन से किया।
एनएचएआई के अनुरोध पर तत्कालीन डीएम ने तत्कालीन एसडीएम मुसाफिरखाना को सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याप्ति (काला) नामित कर प्रक्रिया पूरी कराने को कहा। डीएम का आदेश मिलने के बाद मुसाफिरखाना में तैनात रहे तत्कालीन एसडीएम आरडी राम ने मार्च 2015 में 45 गांवों में मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की।
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आननफानन पूरी की गई इस प्रक्रिया के बाद बाईपास में शामिल कृषि योग्य जमीनों का मुआवजा भी एनएच के बराबर निर्धारित कर भूमि को अवार्ड कर मुआवजा का वितरण भी शुरू कर दिया गया। इस मामले में गड़बड़ी की सुगबुगाहट के बाद वर्ष 2020 से मुआवजा वितरण पर रोक है। हालांकि इस बीच करीब 95 प्रतिशत मुआवजा वितरित कर दिया गया है। मौजूदा डीएम राकेश कुमार मिश्र की ओर से पिछले दिनों कराई गई जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
जांच में पाया गया कि यदि मामले में अफसरों ने गड़बड़ी नहीं की होती तो एनएचएआई को 564 करोड़ रुपये के बजाय सिर्फ 180 करोड़ रुपये ही खर्च करने पड़ते। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद डीएम कोर्ट एनएचएआई की ओर से प्रस्तुत सभी नोटिस का परीक्षण कर उन्हें जारी करने की कोशिश में लगी है। बताया जा रहा है कि यदि किसान नोटिस का समुचित समयबद्ध जवाब नहीं दे सके तो कोर्ट अवार्ड निरस्त कर उनसे रिकवरी का आदेश भी दे सकती है।
384 करोड़ रुपये का घपला सामने आने व जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद एनएचएआई पर भी दबाव बढ़ा है। संभव है कि एनएचएआई जल्दी ही बाईपास में शामिल उन 20 गांवों में गड़बड़ी का आर्बिट्रेटर वाद दायर करे, जिन गांवों के किसानों की जमीनें बाईपास निर्माण में अधिग्रहीत की गई हैं।
जिले में एनएच-56 की लंबाई 49.6 किलोमीटर है। इसमें 45 गांवों के किसानों की भूमि आई है। 15 गांव के किसानों की भूमि एनएच के चौड़ीकरण में तो 30 गांवों के किसानों की भूमि बाईपास में आई है। हालांकि वर्ष 2020 में मुआवजा निर्धारण में गड़बड़ी की आशंका पर एनएचएआई ने डीएम कोर्ट में जो वाद दायर किया है, वह सिर्फ 10 गांवों का है। फिलहाल नोटिस भी इन्हीं दो गांवों के किसानों व सक्षम प्राधिकारी भूमि अध्याप्ति को जारी की जा रही है। मामले में दोनों पक्षों का जवाब मिलने के बाद कोर्ट अगला निर्णय लेगी।
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