अमेठी। सिंचाई के समय नहरों में उड़ रही धूल ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। समय से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाने से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना से ठंड में किसानों के माथे पर पसीना आ रहा है।
किसान निजी नलकूपों से किसी तरह सिंचाई कर भी लें तो सिल्ट सफाई के नाम निभाई गई औपाचारिकता से बाद मेें नहरों का पानी खेतों की फसल को नष्ट करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
खेती-किसानी में किसानों की परेशानी को दूर करने के लिए बनाई गई नहर किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। दिसंबर माह में अधिकांश रवी सीजन की फसलों के सिंचाई का समय होने के बावजूद नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। ऐसे में गेहूं, सरसों, मटर व आलू की सिंचाई के लिए किसानों को किराए के नलकूपों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
सर्वाधिक परेशानी किसानों की इस बात की है कि किसी तरह वह किराए के नलकूप से सिंचाई कर भी लें तो सिल्ट सफाई के नाम पर की गई औपचारिकता से नहरों में पानी आने पर पटरी कटने या ओवर होने पर उनकी फसल नष्ट हो जाएगी। ऐसे में सिंचाई की आस लगाए बैठे किसानों को रवी फसलों की सिचाई के लिए नहर माइनरों में पानी आने की राह देख रहा है।
किसानों का कहना है की विभाग की उदासीनता को भी उन्हें ही झेलना है। एक तो इसमें समय पर पानी आएगा नहीं और जब आएगा भी तो टेल तक सिल्ट सफाई ना होने की वजह से जगह जगह कट कर फसल बर्बाद करेगी।