अमेठी में विना सुरक्षा मानकों के जाती निजी स्कूली वैन। -संवाद
अमेठी। जिले में स्कूली वाहनों के संचालन में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। कई चालकों के पास न वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही व्यावसायिक अनुमति, फिर भी वे बच्चों को ले जा रहे हैं। पुलिस और परिवहन विभाग की निगरानी कमजोर दिख रही है। कई चालकों के पास न पांच वर्ष का अनुभव है और न ही पुलिस सत्यापन। महिला सहायक की अनिवार्यता भी लागू नहीं दिखती।
नियमों के अनुसार चालक के पास वैध व्यावसायिक लाइसेंस, पर्याप्त अनुभव और पुलिस सत्यापन जरूरी है। हर वाहन में प्रशिक्षित महिला सहायक की तैनाती आवश्यक मानी जाती है, लेकिन इन प्रावधानों का पालन नहीं हो रहा है। कई वाहनों में ओवरलोडिंग, अतिरिक्त सीटें और खराब स्थिति भी देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि लाइसेंस मांगने पर चालक स्पष्ट उत्तर नहीं देते। कई मामलों में लाइसेंस उपलब्ध नहीं होता है। अभिभावक बस की फिटनेस रिपोर्ट मांगने, किराया निर्धारण और निजी वाहनों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
एआरटीओ महेंद्र बाबू ने बताया कि चालकों के लाइसेंस की जांच की जाती है और स्कूल प्रबंधन को मानकों के अनुरूप वाहन संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिभावक बोले, वाहनों की हालत ठीक नहीं
शहर के पंकज मिश्र ने बताया कि प्रवेश के समय चालक ने मनमाना किराया बताया। लाइसेंस दिखाने में असमर्थ रहा। वाहन में अतिरिक्त सीटें लगी थीं और हालत भी ठीक नहीं थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बच्चे को खुद स्कूल पहुंचाना शुरू किया। खेरौना निवासी अमित शुक्ल ने बताया कि सड़क हादसों के बाद उन्होंने बच्चों को स्वयं स्कूल पहुंचाना शुरू किया। एक घटना में चालक के पास लाइसेंस नहीं मिला। ऐसे मामलों से चिंता बनी रहती है। शहर के अनिल तिवारी ने बताया कि वैन में एलपीजी सिलिंडर और जर्जर सीटें देखकर उन्होंने बच्चे को खुद लाना-ले जाना शुरू किया। कई चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं है।