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जिले को नहीं मिलेगा होली स्पेशल का फायदा

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संग्रामपुर (अमेठी)। घर से दूर अन्य राज्यों में जाकर नौकरी करने वाले ज्यादातर लोग अपने घर परिवार के साथ होली का त्यौहार मनाते हैं। इसके चलते ज्यादातर ट्रेनों में अभी से वेटिंग आने लगी है। खास तौर पर दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू से आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भरमार है। चुनाव के कारण रोडवेज बसों का संचालन सीमित होने से उन्हें दोहरी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। वहीं टिकट नहीं मिलने से कुछ परदेसी घर आने का प्रोग्राम स्थगित कर दे रहे हैं।
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इसी माह में 17 मार्च को होलिका दहन होगा। उसके अगले दिन 18 मार्च को होली खेली जाएगी। हिंदू समुदाय के इस प्रमुख त्यौहार का असर अभी से नजर आने लगा है। यात्री ट्रेनों में 16 मार्च तक की अभी से लंबी वेटिंग आने लगी है। दिल्ली से अमेठी आने वाली पद्मावत एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस व गरीब रथ एक्सप्रेस और मुंबई से भी आने वाली गाड़ियों में अभी से यात्रियों को प्रतीक्षा सूची लंबी होती जा रही है। स्लीपर कोच के अलावा वातानुकूलित कोच की भी अधिकांश सीटें रिजर्व हो चुकी हैं। अपने घरों से बाहर रह रहे परदेसियों का कहना है कि स्लीपर तक के किराए में आ सकते हैं। वातानुकूलित में किराया अधिक लगता है। जिसके चलते इस बार होली घर पर नही मना सकेंगे। सरकार को कोरोना में बंद हुई सभी ट्रेनों का संचालन पुन: प्रारंभ कर देना चाहिए। जिससे बाहर रह रहे सभी लोग आसानी से अपने घर आ सकें।
क्या कहते हैं परदेसी
मोहित कुमार ने बताया कि मुंबई में रहते हैं। हर बार होली के दो महीने पहले ही रिजर्वेशन करा लेते थे। पर इस बार भूल गए। पिछले एक सप्ताह से आपने अमेठी के आसपास के भी स्टेशनों तक का टिकट खोज रहे हैं। पर हर जगह वेटिंग ही मिल रही है। इस बार होली घर वालों के साथ नही मना पाएंगे। मुकेश मिश्र ने बताया कि दिल्ली में परिवार के साथ रहता हूं। अगर हम अकेले होते तो बस से या कैसे भी गांव आ जाते। पर छोटे बच्चे भी हैं। इसलिए बिना रिजर्वेशन नहीं आ सकते। आखिरी रास्ता तत्काल टिकट का है। वह भी नहीं के बराबर चांस है। हो जाएगा तभी आ पाऊंगा। आयुष कुमार ने बताया कि सूरत में रहता हूं। रेलवे के रिजर्वेशन में बहुत मारामारी है। दलाल लोग तत्काल के टिकट पर भी हाथ पसारे बैठे रहते हैं। जिसके चलते हम लोग स्वयं टिकट नहीं कर पाते। पैसे भी अकाउंट से कट जाते हैं। टिकट भी वेटिंग का मिल जाता है तत्काल टिकट कराने पर।
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