अमेठी सिटी। जिले के करीब 115 विद्यालयों के ऊपर से गुजरी विद्युत लाइन यहां पढ़ने वालों बच्चों व तैनात शिक्षकों के लिए खतरा बनी हुई है। स्कूलों से बिजली लाइन हटाने को लेकर उर्जा निगम और शिक्षा विभाग के अपने तर्क हैं। दोनों ओर से एक दूसरे के पाले में जिम्मेदारी डालते हुए लापरवाही की जा रही है। वर्षों से बनी इस समस्या पर आला अधिकारी भी कोई खास ध्यान नहीं दे रहे हैं। उर्जा निगम व शिक्षा विभाग सिर्फ कवायद जारी होने की बात कह रहे हैं।
स्कूल पहले से लाइन बाद में खींची बाजार शुकुल। प्राथमिक विद्यालय मवैया में स्कूल पहले से है, वहीं बिजली लाइन बाद में खींच दी गई। इस लाइन से बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रभारी प्रधानाध्यापक पंकज कुमार ने बताया कि बिजली लाइन बाद में आई है। इसके लिए कई बार खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से ऊर्जा निगम को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बिजली लाइन से बच्चों को दूर रखते हुए पठन-पाठन कार्य किया जा रहा है।
बिजली लाइन से बना खतराजामो। विद्यालय के ऊपर से बिजली लाइन गुजरने से खतरा बना हुआ है। तार टूटने या किसी अन्य स्थिति में करंट फैलने का डर बना है। ग्राम पंचायत बरेहटी स्थित प्राथमिक विद्यालय पूरे उदित के प्रभारी प्रधानाध्यापक भूपेंद्र वर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग व ऊर्जा निगम दोनों से इस संबंध में शिकायत की जा चुकी है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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जगदीशपुर। विकासखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हरपालपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक अंजना पांडेय ने बताया कि विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरी है। जिससे हर समय खतरे का आभास रहता है। इस संबंध में कई बार शिकायत के बाद भी अभी तक लाइन हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे बच्चों व अभिभावकों में भी डर बना है।
1.36 करोड़ का भेजा है एस्टीमेट ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता रविकांत ने बताया कि जिले के 115 विद्यालयों के ऊपर से बिजली लाइन गुजरी है, जिसे शिफ्ट करने के लिए शिक्षा विभाग को 1.36 करोड रुपये का एस्टीमेट भेजा गया है। धनराशि जमा होने के बाद बिजली लाइनों को स्कूल के ऊपर से हटाकर शिफ्ट किया जाएगा।
54 विद्यालय पहले से थे मौजूद
बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि जिले में 115 में 54 विद्यालय पहले से बने हुए थे। यहां बिजली लाइन बाद में खींची गई है। ऐसे में इन विद्यालयों में लाइन शिफ्ट करने का खर्च ऊर्जा निगम को स्वयं वहन करना होगा। बाकी 61 विद्यालयों के लिए खर्च होने वाली धनराशि की मांग शासन से की गई है।