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सात माह से ठप है ग्राम पंचायत का विकास कार्य

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अमेठी। स्थानीय विकास खंड की ग्राम पंचायत घाघूघार में पिछले सात माह से विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। वजह ग्राम प्रधान के साथ पंचायत सचिव का खाता अब तक नहीं खोला जा सका है। जबकि मौजूदा समय में उक्त ग्राम पंचायत में दो-दो ग्राम विकास अधिकारियों की तैनाती है।
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ग्राम पंचायत घाघूघार में निर्वाचित ग्राम प्रधान सूरज यादव ने मई में शपथ ली। शपथ लेने के बाद ग्राम पंचायत के खाते में राशि नहीं थी। इस बीच प्रधान ग्राम पंचायत की बैठक व अन्य विकास कार्य की रूपरेखा तैयार ही करा रहे थे कि गांव में तैनात पंचायत सचिव कमलेश कुमार का स्थानांतरण हो गया। 20 सितंबर को ग्राम विकास अधिकारी नीलम को ग्राम पंचायत में तैनात किया गया। तीन माह बीतने के बावजूद ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी का खाता नहीं खुल सका।
खाता नहीं खुलने के कारण ग्राम पंचायत में सामान्य कार्य मृत्यु जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल के लिए ग्रामीण परेशान हैं। पंचायत सचिव द्वारा तीन माह बीतने के बावजूद खाता नहीं खुलवाने पर ग्राम प्रधान ने इसकी शिकायत अफसरों से की। बावजूद इसके अफसरों ने पहले से तैनात ग्राम विकास अधिकारी का स्थानांतरण किए बिना 23 नवंबर को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए एक और ग्राम विकास अधिकारी चंद्रशेखर की तैनाती कर दी।
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फिर भी अब तक प्रधान और सचिव का खाता नहीं खुल सका। ऐसे में ग्राम पंचायत में अब तक एक भी विकास कार्य तक शुरू तक नहीं हो सका। यही नहीं निर्माणाधीन पंचायत भवन की शटरिंग होने के बाद कार्य बंद पड़ा है। ग्राम पंचायत में एक माह से मनरेगा कार्य भी बंद है। डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी नीलम को नोटिस जारी किया गया है। जवाब नहीं मिलने की दशा में उन्हें हटाकर नए ग्राम पंचायत अधिकारी की तैनाती जल्द कर दी जाएगी। ग्राम प्रधान सूरज यादव के अनुसार वह तीन माह से अफसरों का चक्कर काट रहे हैं। ग्राम पंचायत में दो सचिव तैनात हैं, लेकिन खाता नहीं खुलने से सभी विकास कार्य बाधित हैं।
गांव निवासी अजय कुमार ने बताया कि गांव के सभी विकास कार्य ठप पड़े हैं। विजय शंकर मिश्र के अनुसार पंचायत सचिव के रवैये के चलते ग्रामीण परेशान हैं। ऐसे में विकास कार्य ठप पड़ा है। श्रीनरेश ओझा ने बताया कि नाली इंटरलॉकिंग आदि का निर्माण कार्य रुका हुआ है। मुस्तकीम के अनुसार पेयजल के लिए गांव में लगे इंडिया मार्का टू हैंडपंप खराब पड़े हैं। इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। मनरेगा का कार्य भी पिछले एक माह से बंद है। मजदूरों को काम नहीं मिलने के चलते उन्हें बाहर जाना पड़ रहा है।
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