संग्रामपुर के धौरहरा गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
संग्रामपुर। धौरहरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को प्रयागराज से आए प्रवाचक देवव्रत ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि प्रेम, विश्वास और समर्पण जीवन को सही दिशा देते हैं। मनुष्य को अपने व्यवहार में विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए।
प्रवाचक ने बताया कि रुक्मिणी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण उनकी भक्ति का प्रतीक है। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानकर उनसे विवाह करने का संकल्प लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी पुकार स्वीकार की। इस प्रसंग से सीख मिलती है कि जीवन में दृढ़ विश्वास के साथ विवेक और साहस भी जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि रिश्तों की मजबूती प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के सम्मान पर निर्भर करती है। मनुष्य को अहंकार और स्वार्थ से दूर रहकर दूसरों की भावनाओं को समझना चाहिए। श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने और प्रेम, सेवा व परोपकार को व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस मौके पर बृजबली सिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह, अशोक सिंह, बृजेश सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, कमलेंद्र प्रताप सिंह, आशीष सिंह गुड्डू, शैलेश सिंह, राजकुमार सिंह और मनीष सिंह आदि मौजूद रहे।