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छह साल मेें नहीं पूरा हुआ एनएच-731 का निर्माण

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01 : जगदीशपुर : क्षतिग्रस्त हुआ दो वर्ष पूर्व निर्मित लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग। -संवाद - फोटो : AMETHI
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जगदीशपुर (अमेठी)। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को फोरलेन से जोड़ने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना छह वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। लखनऊ से सुल्तानपुर के मध्य चौड़ीकरण का कार्य जहां दो वर्ष पहले पूरा हो चुका है वहीं सुल्तानपुर से वाराणसी के बीच सड़क निर्माण का कार्य एक चौथाई बाकी है। जहां सड़क निर्माण कार्य पूरा भी हुआ है वहां घटिया निर्माण के चलते सड़क बैठ गई है या उसमें दरार आ गई है। निर्मित सड़क पर लगे सैकड़ों पैच को इनकी बानगी माना जा सकता है।
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केंद्र की मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में लखनऊ से वाराणसी को फोरलेन सड़क से जोड़ने की मंजूरी दी थी। योजना को धरातल पर उतारा जा सके इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-56 का नाम बदलकर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-731 में कर दिया। 256 किलोमीटर लंबी सड़क (दोनों तरफ के दोनों लेन सात-सात मीटर चौड़े अरौर दोनों तरफ दो-दो मीटर की पटरी) को बनाने के लिए 4,200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बना था। एनएचआई ने प्रस्तावित राजमार्ग को लखनऊ और वाराणसी दो जोन में बांट दिया।
प्रस्तावित सड़क को लखनऊ और वाराणसी दो जोन में बांटकर (सुल्तानपुर से लखनऊ तक 128 किलोमीटर और सुल्तानपुर से वाराणसी तक 128 किलोमीटर) पहली परियोजना का 2000 करोड़ रुपये और दूसरी परियोजना का 2200 करोड़ रुपये आवंटित कर दिया। धनावंटन के बाद वर्ष 2016 में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा जून 2018 निर्धारित की गई थी। लखनऊ और वाराणसी दोनों जोनों की कार्यदायी संस्थाएं अलग अलग थीं।
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लखनऊ जोन की कार्यदायी संस्था ने काम में तेजी लाते हुए परियोजना के काम को पूरा कर अप्रैल 2019 में रोड का संचालन बहाल कर दिया। और वाराणसी जोन की कार्यदायी संस्था का काम कच्छप गति वाला रहा। निर्माण निर्धारित समय में पूरा न करने की वजह से विभाग ने काम पूरा करने के समय को बढ़ाते हुए नवंबर 2019 तक का समय दे दिया, फिर भी इसे अभी पूरी तरह से तैयार नहीं किया जा सका है। इस पर अभी बीच बीच में लगभग 25 प्रतिशत काम बचा है। फोरलेन सड़क की यह परियोजना पूरी नहीं होने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काशी से लखनऊ को जोड़ने का सपना अधूरा ही है।
दो साल में जवाब दे गई सड़क
लखनऊ और सुल्तानपुर के मध्य निर्मित फोरलेन सड़क का निर्माण भी गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं हुआ। शायद यही वजह रही कि इस सड़क पर लखनऊ से सुल्तानपुर के मध्य सैकड़ों स्थानों पर पैचिंग की नौबत आ गई। और तो और जगदीशपुर स्थित सेल फैक्टरी के सामने व कई अन्य स्थान पर सड़क में दरार आ गई है।
तय करनी पड़ती अधिक दूरी
लखनऊ वाराणसी का आधा सफर मुश्किल भरा होने के कारण राहगीर इस सीधे सड़क पर आवाजाही से कतराते हैं। अधिकांश लोग वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेकर वाराणसी तक का सफर तय करते हैं। इसके चलते उन्हें 40 से 50 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
यात्री सुविधाएं भी बदहाल
फोरलेन के किनारे बसों और ट्रकों के ठहराव के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई गई है। मार्ग के दोनों तरफ बस स्टैंड और ट्रक सर्विस लेन बनी है जहां पर रास्ते में ट्रक चालक वाहनों को खड़ा करके रेस्ट ले सकें। लखनऊ से सुल्तानपुर के बीच बने बस स्टैंड पर मिलने वाली यात्री सुविधाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। सुल्तानपुर से वाराणसी के बीच अभी इसे अमलीजामा ही नहीं पहनाया जा सका है।
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