अमेठी। विश्व में शांति, संयम और संतुलन का धर्म सबसे बड़ा आधार है और धर्म का मूल भक्ति है। भक्ति से जुड़कर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। यह बातें संग्रामपुर क्षेत्र के ठेंगहा पूरे हरिवंश गांव में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन प्रवाचक कृष्णानंद ने बुधवार ने कही।
प्रवाचक ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग और मर्यादा का प्रतीक है। उनके आदर्शों पर चलकर ही मनुष्य अपने आचरण को शुद्ध कर सकता है। रामनाम जप मन को पवित्र करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। बताया कि प्रभु राम करुणा और न्याय के अवतार हैं। उनके चरित्र में समर्पण, सेवा और सहनशीलता की अनुपम झलक मिलती है। श्रीराम की मर्यादा ही मानव जीवन के लिए सर्वोच्च मार्गदर्शक है। कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सेवा, संयम और सदाचार को स्थान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही व्यक्ति अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है। इस मौके पर गार्ड मिश्र, अरविंद मिश्र, गोपी तिवारी, मनोज मिश्र, विजय तिवारी, अवनीश मिश्र, धीरेंद्र शुक्ल, अनुभव मिश्र आदि मौजूद रहे।