अमेठी सिटी।जिला मुख्यालय गौरीगंज में जाम की समस्या से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। चिलबिला-अमेठी-गौरीगंज-मुसाफिरखाना मार्ग पर टिकरिया से 4.50 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण शुरू हो गया है। इसके बनने से टिकरिया औद्योगिक क्षेत्र से रोज गुजरने वाले एक हजार से अधिक ट्रक, ट्रेलर और टैंकर शहर के भीतर नहीं आएंगे। इससे करीब दो लाख आबादी को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
अभी औद्योगिक क्षेत्र से आने-जाने वाले भारी वाहनों को गौरीगंज के मुख्य मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। इससे बाजार और प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। वाहनों की संख्या बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। इससे स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और बाजार आने वाले लोगों को परेशानी होती है। बाईपास बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर से बाहर निकलने का सीधा मार्ग मिल जाएगा।
तीन प्रमुख मार्गों पर घटेगा दबाव
बाईपास बनने से गौरीगंज-प्रतापगढ़, रायबरेली-सुल्तानपुर और गौरीगंज-मुसाफिरखाना मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा। शहर के भीतर भारी वाहनों की संख्या घटने से स्थानीय वाहनों के आवागमन में भी आसानी होगी।
बाजार और औद्योगिक क्षेत्र को फायदा
टिकरिया औद्योगिक क्षेत्र में आने-जाने वाले मालवाहक वाहनों को बाजार के बीच से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधरेगी। लंबे समय से जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों को बाईपास बनने से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अंडरपास और दो माइनर ब्रिज बनेंगे
बांदा-टांडा हाईवे पर मिसरौली के पास अंडरपास का निर्माण भी शुरू हो गया है। बाईपास पर दो छोटे पुल बनाए जाएंगे। नहर और संपर्क मार्गों पर जंक्शन तैयार किए जाएंगे, जिससे आसपास के गांवों से आने-जाने वाले लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने में सुविधा होगी।
नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
एनएच के सहायक अभियंता समृद्ध शुक्ल ने बताया कि गौरीगंज बाईपास का निर्माण शुरू करा दिया गया है। 69.28 किलोमीटर लंबे चिलबिला-अमेठी-गौरीगंज-मुसाफिरखाना हाईवे और इससे जुड़े सभी बाईपास का निर्माण नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।