अमेठी सिटी। जिले के वारिसगंज और गौरीगंज स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय को जल्द निजी भवन मिल जाएंगे। इसके लिए दोनों स्थानों पर राजस्व विभाग के सहयोग से भूमि चिह्नित कर ली गई है। 50 लाख की लागत से दोनों चिकित्सालयों का निर्माण होगा। विभाग की ओर से बजट स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
जिला आयुष मिशन की ओर से संचालित कई आयुर्वेदिक चिकित्सालय पीएचसी, सीएचसी व दान स्वरूप निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में जहां चिकित्सकों व कर्मियों को परेशानी उठानी पड़ रही है वहीं, मरीजों व तीमारदारों को भी सहूलियत नहीं मिल पाती है। विभाग की ओर से आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को अपने खुद के भवन में संचालित कराए जाने की कवायद शुरू की गई है।
गौरीगंज का आयुर्वेदिक अस्पताल भटगवां पीएचसी के और वारिसगंज आयुर्वेदिक अस्पताल नंदमहर पीएचसी के एक कमरे में संचालित हो रहा है। विभाग की ओर से इन दोनों आयुर्वेदिक अस्पतालों को नए भवनों में चलाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दोनों स्थानों पर अस्पताल के भवन निर्माण को लेकर राजस्व विभाग के सहयोग से भूमि चिह्नित कर ली गई है। 50 लाख रुपये की लागत से दोनों आयुर्वेदिक भवनों का निर्माण होगा। विभाग की ओर से बजट के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। बजट स्वीकृति के बाद जल्द निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
अस्पताल भवन में बनेंगे यह कक्ष
इन नए भवनों में चिकित्सक, फार्मासिस्ट आदि के तीन-तीन कक्ष बनेंगे। एक-एक हॉल, प्रसाधन व चारदीवारी आदि का भी निर्माण किया जाएगा। नया भवन बनने के बाद मरीजों के साथ चिकित्सकों व कर्मियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
एक लाख की आबादी को मिलेंगी सुविधाएं
ग्रामीण क्षेत्र के नंदमहर और भटगवां पीएचसी में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज के लिए करीब 50-50 हजार की आबादी पहुंचती है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक अस्पताल में प्रतिदिन की औसतन ओपीडी में करीब 35 से 40 मरीज पहुंचते हैं। वहीं नए भवन बनने से मरीजों के लिए सुविधाओं का विस्तार होगा।
बजट स्वीकृति के लिए भेजा गया प्रस्ताव
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी अमेठी सुल्तानपुर प्रभारी डॉ. अब्दुल बारी ने बताया कि बजट स्वीकृति के लिए प्रस्ताव आयुष मिशन को भेज दिया गया है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।