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Amethi News: ग्राम पंचायतों के बैंक खाते में लौटे 5.30 लाख रुपये

Sat, 11 Jan 2025 04:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
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बाजारशुकुल (अमेठी)। बिना डोंगल पीएफएमएस पोर्टल से तीन ग्राम पंचायतों की विकास निधि निजी फर्म के खाते में पहुंचने का मामला सुलझने के बजाय उलझता ही जा रहा है। शुक्रवार को स्वत: दो पेमेंट निरस्त होने के बाद 5.30 लाख रुपये ग्राम पंचायत के खाते में लौट आए।
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विकास खंड बाजार शुकुल की ग्राम पंचायत तेंदुआ, संसारपुर व खेममऊ ग्राम पंचायत को आवंटित 17, 91,950 रुपये की निधि क्षेत्र में ही संचालित एक निजी फर्म के बैंक खाते में पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से जमा हो गया था। मामले में नोटिस जारी होने के बाद शुक्रवार को पंचायत सचिव जितेंद्र कुमार, तेंदुआ ग्राम प्रधान दान बहादुर गुप्ता, संसारपुर ग्राम प्रधान अनीता देवी और खेमेमऊ ग्राम प्रधान सरजू पाल व एडीओ पंचायत को डीपीआरओ कार्यालय बुलाया गया। कार्यालय में तकनीकी जानकारों की टीम ने भुगतान प्रक्रिया की जांच की।
डीपीआरओ मनोज त्यागी ने बताया कि पीएफएमएस पोर्टल से भुगतान की व्यवस्था होने के बाद बिना सचिव व प्रधान के जानकारी के भुगतान होना गंभीर मामला है। मामले की जांच हो रही है। शुक्रवार को सचिव संग ग्राम प्रधानों का बयान लेने के साथ अभिलेख की जांच की गई। पेमेंट निरस्त होने से 5.30 लाख रुपये वापस भी आ गए हैं। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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निजी व्यक्ति को डोंगल देकर करवाया जाता था भुगतान
शुक्रवार को ग्राम प्रधानों के बयान से एक बात तो साफ हुई कि भुगतान के मामले में नियमों की जमकर अनदेखी हो रही है। ग्राम प्रधानों ने सचिव के कहने पर निजी व्यक्ति को डोंगल देने की बात स्वीकार की है। लेकिन कहा कि भुगतान के बाद डोंगल वापस ले लेते थे। ऐसे में यह भुगतान कब हो गया इसकी जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है।


मामले में उठ रहे सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच सिर्फ तीन बिंदुओं पर टिकी है। पहला बिना डोंगल पीएफएमएस पोर्टल से भुगतान नहीं हो सकता, ऐसे में या तो जिम्मेदारों की जानकारी या किसी परिचित ने बिना जानकारी के भुगतान किया है। दूसरा साइबर अपराधी ने खाते को हैक कर भुगतान करवा लिया है, लेकिन इस स्थित में संपूर्ण धनराशि निकल जाती और पास के फर्म के खाते में भुगतान नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल है कि अक्तूबर से दिसंबर तक ग्राम पंचायत की निधि अंतरित होती रही और सचिव को जानकारी तक नहीं हुई। जबकि प्रत्येक माह बैंक स्टेटमेट लिया जाता है और विभाग भी लेखाजोखा देता है।
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