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टपकती छत, जर्जर दीवारें परिषदीय स्कूलों की पहचान

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09 : भादर : जर्जर पड़ा प्राथमिक स्कूल रामगंज। -संवाद - फोटो : AMETHI
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भादर (अमेठी)। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बनाए गए परिषदीय स्कूलों की हालत जर्जर है। अति विशिष्ट संसदीय क्षेत्र अमेठी के विकास खंड भादर के गांवों में बनाए गए उच्च प्राथमिक विद्यालयों की हालत बद से बदतर है। कई दशक से राहुल गांधी तो इस समय केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। बावजूद इसके सरकारी विद्यालयों का यह हाल है।
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कई विद्यालयों के भवन निर्माण में निर्माण प्रभारियों को न तो नौनिहालों को जान की चिंता रही न प्रशासन का भय। बताया जाता है की तत्कालीन भवन निर्माण प्रभारियों द्वारा मानक के विपरीत भवन का निर्माण कर लाखों रुपये का गोलमाल कर दिया गया। इसकी वजह से समय से पूर्व ही कई विद्यालय जर्जर हो गये हैं। उनकी हालत इतनी खराब है की कब ढह जाएं और बड़ा हादसा हो जाए कुछ नहीं पता।
यह उच्च प्राथमिक विद्यालय हो गये जर्जर
वर्ष 2007-2008 में स्वीकृत नवीन उच्च प्राथमिक विद्यालय मवइया की हालत खराब है। भवन जर्जर हो गया है। दीवारें फट गई हैं और छतों से पानी टपकता है। खिड़कियों पर बनाया गया छज्जा भी ढह गया है। फर्श उखड़ गई है। खिड़की दरवाजा समेत पूरा विद्यालय जर्जर हो गया है। विद्यालय देखने से लगता है जैसे 50 वर्ष पुराना हो। जबकि उक्त विद्यालय का निर्माण हुए 14 वर्ष भी नहीं पूरे हुए हैं। बताया जाता है की तत्कालीन भवन निर्माण प्रभारी लाखों रुपये का गोलमाल करके धन हड़प लिया है।
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मानक विहीन कार्य होने की वजह से समय से पूर्व ही विद्यालय जर्जर हो गया। वर्ष 2008-2009 में निर्मित उच्च प्राथमिक विद्यालय घनश्यामपुर का तो और बुरा हाल है। विद्यालय की दीवारें दरक गई हैं। छत जगह-जगह फट गई हैं, फर्श टूट गई है। कायाकल्प योजना के तहत फर्श पर टाइल्स जरूर लगाई गई लेकिन उसमें भी खानापूर्ति ही की गई। बताया जाता है की टाइल्स लगाते समय केवल बालू का ही प्रयोग किया गया है, जिससे टाइल्स उखड़ जा रही हैं।
टाइल्स भी घटिया किस्म की लगाई गई हैं। शौचालय का भी बुरा हाल है। सूत्रों के अनुसार तत्कालीन भवन निर्माण प्रभारी दोयम किस्म की ईंट, घटिया किस्म की बालू, लोहे की सींक थर्ड क्वालिटी का प्रयोग कर लाखों रुपये सरकारी धन की बंदरबांट कर लिया। उस समय ग्रामीणों ने मानक विहीन हो रहे कार्यों की शिकायत की लेकिन अफसरों ने भी मामले में लीपापोती कर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। ये विद्यालय कब ढह जाएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता।
इन स्कूलों में हमेशा नौनिहालों को जान का खतरा बना रहता है। वर्ष 2008-2009 में ही निर्मित नवीन उच्च प्राथमिक विद्यालय दहियावां का तो और बुरा हाल है। यहां निर्माण के दो वर्ष बीतने तक छत से पानी टपकने लगा। दीवारों में दरारें पड़ गईं और फर्श उखड़ गई। अब तक विद्यालय के छत के ऊपर प्लास्टर तक नहीं किया गया है। फर्श पर गिट्टी के बजाय ईंट व मिट्टी से बनाया गया था। कमोवेश यही हाल उच्च प्राथमिक विद्यालय त्रिसुंडी रामगंज का भी है।
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