जगदीशपुर (अमेठी)। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है। दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वही मनुष्य महात्मा होता है। ये बातें क्षेत्र के आरिकपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को प्रवाचक सुरेंद्र महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि जीवन नश्वर है। लेकिन अगर इसे ईश्वर के चिंतन में लगाएंगे तो यह जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहा कि धरती पर जिसने भी जन्म लिया, उसे एक न एक दिन जाना है। लेकिन अगर जीवन को भगवान के स्मरण में लगाया जाएगा तो इस जीवन का रूप बदल जाएगा।
प्रवाचक ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला से ही जीवात्मा व परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। जब जीव में अभिमान आ जाता है तो वह भगवान से दूर हो जाता है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।