आशीष की मौत के बाद घर में कोहराम मचा हुआ है। मां सोनी रो-रोकर बेसुध हो गई है। हर किसी से बस यही कहती हैं कि अगर जानती कि ऐसा होगा तो कभी बेटे को शादी में न भेजती। सज-धज कर खुश होकर गया था। क्या पता था कि अब उसकी सूरत ही आखिरी बार देख रही हूं। मां की करुण वेदना सुनकर आसपास के लोगों की आंखें भी भर आईं। भाई अजीत और बहन सुशीला का भी रो-रोकर बुरा हाल है। पिता शिव बहादुर गुमसुम हैं, जैसे पूरी दुनिया उजड़ गई हो। रवि के घर में भी मातम पसरा है। मां पार्वती किसी से बेटे का हाल पूछती और फिर फफक उठती, कोई बता दो मेरा बेटा कहां है। रात में बोला था अम्मा जल्दी लौट आऊंगा। सुबह हो गई, मेरा लाल कहां है। बहन माया, गुलाबा और नीलम की आंखें आंसुओं से सूजी हुई हैं। पिता शिवरतन सीने से लगकर लोगों से कहते हैं हे भगवान, यह क्या हो गया। दीपक, शिवा, मालिक उर्फ संदीप, शानू उर्फ संतोष कुमार और तेज बहादुर उर्फ हल्ला को हिरासत में लेते हुए पूछताछ की जा रही है। अन्य की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
बहन के घर जाने की कोशिश कर रहे थे... पुलिस के पास पहुंचते तो शायद बच जाती जान
विवाद के बाद जान बचाने को आशीष और रवि ने बहन के घर सरौली की ओर भागने का फैसला किया। पांच किलोमीटर तक बाइक से भागे भी लेकिन यह रास्ता वीरान और सुनसान था। अगर वे दूसरी दिशा यानी गौरीगंज की ओर मुड़ते, तो महज दो किलोमीटर दूर पुलिस की डायल 112 गाड़ी मिल सकती थी। पुलिस की मौजूदगी शायद हमला होने ही नहीं देती और दोनों की जान बच जाती लेकिन दबंगों ने सुनसान इलाके में घेरकर हमला किया। अगर आसपास आबादी होती तो शायद कोई मदद को आ जाता।
विवाद की खबर के बाद वैवाहिक रस्में भी अधूरी रहीं, सन्नाटे में बदला जश्न
आशीष और रवि की मौत रविवार को हुई लेकिन हमले की सूचना शादी वाले घर तक शनिवार रात ही पहुंच गई थी। जहां कुछ देर पहले तक मंगलगीत गूंज रहे थे, वहां सन्नाटा पसर गया। डीजे बंद हुआ और किसी तरह हड़बड़ी में वैवाहिक रस्म पूरी की गई। बराती वहां से चले गए और घराती अस्पताल में घायल युवकों के इलाज में जुट गए। खुशी का माहौल देखते ही देखते मातम में बदल गया।