गौरीगंज (अमेठी) गेहूं की फसल की दूसरी व अंतिम सिंचाई के समय जिले के तकरीबन सभी प्रमुख रजबहों में धूल उड़ रही है। रजबहों से निकलने वाली माइनरों पर आश्रित किसानों को फसल की सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में जहां हजारों बीघा फसल सिंचाई के अभाव में बर्बाद हो रही है वहीं जानकारी के बाद जिम्मेदार उदासीन हैं।
गोगमऊ से निकलकर गौरीगंज व अमेठी तहसील क्षेत्र के अधिकांश भाग में सिंचाई के लिए बनाया गया अमेठी रजबहा इन दिनों किसानों के लिए दिखावा साबित हो रहा है। आलम यह है कि गेहूं की दूसरी व अंतिम सिंचाई के साथ जायद फसलों की तैयारी के लिए खेतों में नमी करने के लिए पानी की जरूरत के समय रजबहे में पानी नहीं है।
किसानों को सिंचाई के लिए निजी या किराए के नलकूप का सहारा लेना पड़ रहा है। जहां नलकूप नहीं हैं वहां फसल सूखने के कगार पर पहुंच रही है। किसान सरयू प्रसाद, धर्मराज, संतोष, मंगरू व सियाराम ने बताया कि समय से पानी नहीं मिलने से जहां उत्पादन प्रभावित होगा वहीं विलंब से सिंचाई व हवाओं के चलने से तैयार फसल के गिरने का अंदेशा भी बना हुआ है।
ऐसे में जहां किसान इन दिनों सिंचाई के लिए नहर में पानी छोड़ने की गुहार अफसरों से लगा रहे हैं वहीं जानकारी के बावजूद जिम्मेदार मौन हैं। इस बारे में सिंचाई विभाग के एक्सईएन धर्मेंद्र वर्मा के मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उनका मोबाइल बंद मिला।
नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग
अमेठी। नहरों में पानी नहीं होने से जहां किसानों की फसलें सिंचाई के अभाव में सूख रही हैं वहीं बची खुची फसल छुट्टा मवेशी बर्बाद कर रहे हैं। किसान नेता हरीश सिंह उर्फ चुन्नू, हौसिला प्रसाद यादव, बच्चा शुक्ल, आरपी पांडेय ने उच्चाधिकारियों से टिकरी राजबहा समेत अन्य नहरों में पानी छोड़वाने की मांग की है।