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आईसीएसई बोर्ड परीक्षा में सभी फर्स्ट डिवीजन पास

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07 : जगदीशपुर : परीक्षा परणिाम घोषित होने के बाद आंचल को मिठाई खिलाते माता-पिता। - फोटो : AMETHI
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जगदीशपुर (अमेठी)। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (आईसीएसई) की ओर से शनिवार अपराह्न तीन बजे 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। आईसीएसई बोर्ड के इकलौते क्राईस्ट द किंग स्कूल के सभी विद्यार्थी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में सफल हुए।
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जिले में आईसीएसई बोर्ड का एकमात्र स्कूल (क्राईस्ट द किंग स्कूल) औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। शनिवार को बोर्ड की ओर से कक्षा 10 के घोषित परीक्षा परिणाम में स्कूल में पंजीकृत सभी 59 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं।
परीक्षा परिणाम की यह स्थिति इसके बावजूद रही कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने से बच्चों को घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई पूरी की। प्रधानाचार्य फादर आनंद जेम्स फ्रांसिस ने बताया की विद्यालय द्वारा प्रदान किए गए उत्कृष्ट नियमित ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था में शिक्षकों के मेहनत से बच्चों को नई दिशा मिली।
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स्कूल के टॉप फाइव
परीक्षा में स्कूल की छात्रा आंचल भास्कर शुक्ला 95 प्रतिशत अंक के साथ अव्वल रहीं। 90.6 प्रतिशत अंक के साथ प्राची सिंह द्वितीय, 89.6 प्रतिशत अंक के साथ हर्षवेंद्र प्रताप सिंह तृतीय, 89.4 प्रतिशत अंक के साथ शांभवी पाठक चतुर्थ तथा 89 प्रतिशत अंक के साथ नागेश्वर अनुराग वर्मा पांचवे स्थान पर रहे। विद्यालय प्रबंधन ने टॉप फाइव की सूची जारी कर सबका उत्साहवर्धन किया।
इंजीनियर बनना लक्ष्य
आंचल ने बताया वह नियमित रूप से पढ़ाई करती हैं। उन्होंने मोबाइल, सोशल मीडिया और टीवी से खुद को दूर रखा। पिता भास्कर शुक्ल ने बताया कि बेटी का रुझान इंजीनियर बनने का है। वह उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
डॉक्टर बनना चाहती हैं प्राची
90.6 प्रतिशत अंक पाने वाली प्राची ने दूरभाष पर बताया की वह डॉक्टर बनना चाहती हैं। प्राची का कहना है की ऑनलाइन से अच्छी क्लास रूम की पढ़ाई थी। प्राची ने परीक्षा के दौरान किसी तरह की कोचिंग नहीं ली और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहीं। प्राची के पिता प्रदीप सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि बेटी कुछ अच्छा करेगी।
शिक्षकों की मेहनत का परिणाम
क्राइस्ट द किंग स्कूल के अंग्रेजी अध्यपक ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि आँचल, प्राची एवं अन्य छात्र अत्यन्त ही मेधावी और परिश्रमी थे। बच्चे अच्छा कर सकें इसके लिए सभी टीचर्स पूरी लगन से शिक्षण कार्य में जुटे रहते थे।
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