अमेठी सिटी। नैमिष की धरती सीतापुर से वर्ष 2016 में स्थानांतरण के बाद गौरीगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय माधवपुर पहुंचीं शिक्षिका अनीता मिश्रा ने सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा को नई दिशा दी। शुरुआती चुनौतियों, बच्चों की अनियमित उपस्थिति और अभिभावकों की दूरी जैसी स्थितियों से जूझते हुए उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण को आधार बनाया और विद्यालय का माहौल बदलने का संकल्प लिया।
अनीता मिश्रा ने पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि सहभागिता का माध्यम बनाया। कक्षा शिक्षण के साथ खेल, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों को जोड़कर बच्चों की रुचि बढ़ाई। अभिभावकों से नियमित संपर्क रखा गया, खासकर माताओं से बातचीत कर बच्चों की उपस्थिति और निरंतरता मजबूत की गई। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बच्चों का विद्यालय से जुड़ाव बढ़ा।
विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों और अभिभावक सहभागिता के सहारे बच्चों के अध्ययन स्तर और दैनिक व्यवहार में सुधार दिखने लगा। स्वच्छता को लेकर प्रेरणा दी गई, जिससे बच्चे साफ-सुथरी वेशभूषा में विद्यालय आने लगे और स्वच्छता की आदत विकसित हुई। शिक्षिका का मानना है कि हर बच्चा विशेष होता है। इसी सोच के साथ कक्षा की आगे की पंक्ति से लेकर पिछली बेंच तक बैठे बच्चों पर समान ध्यान दिया गया। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा और वे खुलकर अपनी बात रखने लगे।
शिक्षिका और विद्यालय स्टाफ के समन्वित प्रयासों का असर यह रहा कि विद्यालय के विद्यार्थियों का चयन लगातार नवोदय और सैनिक विद्यालयों में होने लगा। पढ़ाई के साथ बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलकूद से भी जोड़ा गया। छात्र जनपद और मंडल स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर पहचान बना रहे हैं। कोरोना काल में भी अनीता मिश्रा ने शिक्षा की कड़ी टूटने नहीं दी। ऑनलाइन माध्यम से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी गई। योग प्रतियोगिताओं में सम्मान प्राप्त कर चुकी शिक्षिका कक्षा में योग और ध्यान का अभ्यास कराकर बच्चों की एकाग्रता बढ़ा रही हैं।
अनीता मिश्रा का सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी सामाजिक, पारिवारिक और पेशेवर दायित्वों का संतुलन साधते हुए आगे बढ़ना चाहती हैं। अमृत महोत्सव कार्यक्रम में कारगिल विजय गाथा विषय पर किए गए कार्यों के लिए जिला अधिकारी अरुण कुमार ने उन्हें सम्मानित किया।