अमेठी सिटी। जरूरतमंदों के लिए करोड़ों की लागत से तैयार किए गए 518 फ्लैट 12 साल से गृह स्वामी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी लापरवाही से यह भवन फिर से बदहाल हो गए हैं। अभी तक शासन स्तर पर इनका आवंटन नहीं कराया जा सका है। उधर, विभाग की माने तो इन भवनों को शहरी किफायती किराया योजना में शामिल किया जाएगा। बसपा सरकार ने वर्ष 2007-08 में जिले के दो जगहों पर कांशीराम आवास की सौगात दी थी। शासन के निर्देश पर जायस नगरीय क्षेत्र में व मुसाफिरखाना तहसील के भनौली गांव में दो एकड़ भूमि चिह्नित की गई। आवास-विकास परिषद को कार्यदायी संस्था बनाकर निर्माण कार्य शुरू किया गया। जायस के मुंशीगंज चौधराना में 124 आवास तो नौगजी वहाबगंज में 144 आवास निर्मित किए गए।
इसके अलावा मुसाफिरखाना के भनौली गांव में 250 आवास बनाए गए। कार्यदायी संस्था की ओर से 2012 मेें निर्माण कार्य पूरा कर जिला नगरीय विकास अभिकरण को हैंडओवर भी कर दिया गया। इसके लिए अभी तक जरूरतमंदों को आवंटन की प्रकिया शुरू नहीं हो सकी है।
जिला प्रशासन ने वर्ष 2016 में अनुसूचित जाति के पात्र एससी लाभार्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किया, लेकिन बाद में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जायस नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी रविंद्र मोहन ने बताया कि जर्जर हो चुके आवासों के लिए नगरीय विकास अभिकरण को पत्र भेजा गया है।
आवासों की हालत खराब
काफी लंबे समय से बंद पड़े आवासों की हालत वर्तमान में खराब हो चुकी है। खिड़की, दरवाजे आदि बहुत खराब हालत में हैं। कई आवासों में खिड़कियां भी टूट गई हैं। पानी की पाइप आदि भी तोड़ दी गई हैं। आवास का प्लास्टर भी निकलने लगा है। बिजली व पानी की व्यवस्था भी आवास में नहीं की गई है।
घुमंतू परिवारों ने बनाया डेरा
लंबे समय से आवंटन की बाट जोह रहे घरों मेेंं घुमंतू परिवारोें ने आशियाना बना लिया है। ज्यादातर मकानों में वह रह रहे हैं। नगरीय विकास अभिकरण के कार्यक्रम निदेशक विनोद मिश्र ने बताया कि वहां रह रहे परिवारों के बारे में उनको जानकारी नहीं है।
किफायती किराया आवास परिसर योजना
नगरीय विकास अभिकरण के पीडी विनोद मिश्र ने बताया कि खाली पड़े आवासों को अब सरकार की योजना किफायती किराया आवास परिसर में शामिल किया गया है। शहरी गरीबों को किराये के भवन के रूप में इसका आवंटन किया जाएगा। इससे पहले बदहाल हो चुके आवासों के लिए स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। रेनोवेशन कार्य पूरा होने के बाद ही इसका आवंटन हो सकेगा।