अमेठी सिटी। जिला समाज कल्याण विभाग (विकास) के कार्यालय के अनुरक्षण, सामान आदि की खरीद के लिए डेढ़ माह पहले 4.50 लाख रुपये निकाल लिए गए, लेकिन काम नहीं हुआ। घपले का संदेह होने पर परियोजना निदेशक ने डीएम को पत्र लिखा, जिसके बाद जांच कराई गई। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट व नायब तहसीलदार ने दस्तावेज खंगाले, लेकिन इस काम की फाइल नहीं मिली। इस घपले के तार सामूहिक विवाह योजना में भ्रष्टाचार की कोशिश करने वालों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
समाज कल्याण विभाग (विकास) कार्यालय के लिए फर्नीचर, इन्वर्टर, प्रिंटर, अलमारी, स्टेशनरी आदि की खरीद होनी थी। मेंटेनेंस का काम भी कराया जाना था। इसके लिए करीब चार माह पहले टेंडर कराया गया। जिस फर्म को ये काम मिला, उसके संचालक को बजट भी आवंटित कर दिया गया। इसके बावजूद न तो सामान की खरीद हुई और ना ही अनुरक्षण का काम पूरा हुआ।
करीब एक माह पूर्व इसकी शिकायत जिलाधिकारी संजय चौहान से की गई थी। बीते शुक्रवार को जब अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामकेवल तिवारी, नायब तहसीलदार अनुश्री और प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी ऐश्वर्य यादव की टीम ने कार्यालय का ताला खुलवाया तब ये बात सामने आई। कुछ सामान कार्यालय में मिला, जिसकी खरीद में बाजार रेट से तीन गुना मूल्य दिखाया गया। हालांकि, अभी अफसर इसको लेकर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं।
अफसर छुट्टी पर, सहायक योजना प्रबंधक नदारद
जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) नलिन राज करीब 20 दिनों से मेडिकल छुट्टी पर हैं। इसी विभाग में कार्यरत सहायक योजना प्रबंधक गौरव श्रीवास्तव बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। इनके कक्ष का ताला काफी समय से बंद था। उसी को टीम ने खाेला और जांच की। हालांकि, इस काम से जुड़ी फाइल नहीं मिल सकी, जिससे ये नहीं पता चल सका कि ये काम किस फर्म को आवंटित किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि सामूहिक विवाह योजना में टेंडर डालने वाली एक फर्म को ये काम दिया गया था।
नहीं मिली फाइल, जांच जारी
प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी ऐश्वर्य यादव ने बताया कि गठित टीम ने वीडियोग्राफी कराते हुए अभिलेखों का सत्यापन किया, लेकिन मेंटीनेंस व सामान खरीद से संबधित फाइल नहीं मिली। बताया कि किन सामानों की खरीदारी हुई और क्या बजट निकाला गया, यह फाइल मिलने और जांच के बाद ही सामने आएगा। उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई है।