जगदीशपुर। मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक संयोग लेकर आया है। करीब 22 वर्षों बाद मकर संक्रांति एकादशी तिथि के साथ पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। वर्ष 2003 के बाद यह दुर्लभ संयोग पहली बार बना है। ऐसे में दान-पुण्य, पूजा-पाठ और व्रत का फल कई गुना माना गया है। खास बात यह है कि इस बार श्रद्धालुओं को दो दिन दान-पुण्य का अवसर मिलेगा, लेकिन तिथि के अनुसार दान की वस्तुएं अलग-अलग होंगी।
पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ एकादशी का पर्व है। इस दिन सूर्य दोपहर 3.22 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह समय संक्रांति काल माना जाएगा। एकादशी तिथि होने के कारण आज चावल या खिचड़ी का दान वर्जित है। बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन तिल, गुड़, तिल का तेल, जौ और ऊनी वस्त्र का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। 14 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है।
तिल-गुड़ का दान करने से शनि दोष का शमन होता है, स्वास्थ्य लाभ मिलता है और आर्थिक सुख की प्राप्ति होती है। पंडित आशुतोष पांडेय के अनुसार 15 जनवरी को उदया तिथि मानी जाएगी। इस दिन सूर्य उदय के साथ संक्रांति पर्व का विधिवत पालन किया जाएगा। 15 जनवरी को श्रद्धालु चावल और खिचड़ी का दान कर सकते हैं। इस दिन दान-पुण्य का पुण्यकाल दोपहर 1.32 बजे तक रहेगा। जो श्रद्धालु एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल दान को लेकर संशय में हैं, उनके लिए 15 जनवरी सर्वोत्तम दिन रहेगा।