गौरीगंज (अमेठी)। जिले में संचालित 25 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में जनवरी 2000 के बाद प्रबंधतंत्र की ओर से नियुक्त तदर्थ शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सचिव के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जिले में कार्यरत सभी 42 तदर्थ शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दी है। ऐसे में लंबे समय से नियुक्त तदर्थ शिक्षक जहां बेरोजगार होने की आशंका से परेशान हैं वहीं वेतन न मिलने से परिवार के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
जिले में संचालित सहायता प्राप्त माध्यमिक इंटर कॉलेजों में से अधिकांश में तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति प्रबंधतंत्र की ओर से की गई है। इन शिक्षकों को विभाग कोर्ट के आदेश पर वेतन का भुगतान भी कोषागार के माध्यम से उनके खाते में करता है। कोर्ट के आदेश पर पूरा वेतन पाने वाले शिक्षकों के दायरे में एक जनवरी 2000 के बाद प्रबंधतंत्र की ओर से नियुक्त तदर्थ शिक्षकों में से 42 आते हैं। पिछले दिनों तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रकरण सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुका है।
इसके बाद हुई भर्तियों में तदर्थ शिक्षकों को वेटेज के रूप में अतिरिक्त अंक दिए गये थे। बावजूद इसके जिले में जनता इंटर कॉलेज मवई में नियुक्त अरविंद कुमार पांडेय ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सके थे जो वर्तमान में जनता इंटर कॉलेज रामगंज में कार्यरत हैं। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित शिक्षक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भेजे जा रहे हैं। ऐसे में शासन ने तदर्थ शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने 19 मई को विभागीय अफसरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में डीआईओएस को सभी तदर्थ शिक्षकों का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्दी ही तदर्थ शिक्षकों को कॉलेज आने से भी रोका जा सकता है। तदर्थ शिक्षकों का वेतन रोकने का आदेश सार्वजनिक होने के बाद तदर्थ शिक्षक परेशान हैं। डीआईओएस उदय प्रकाश मिश्र ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले में कार्यरत 42 तदर्थ शिक्षकों के मई माह के वेतन पर रोक लगा दी गई है।
20-20 साल से नौकरी कर रहे शिक्षक
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में तदर्थ शिक्षक के रूप में 20-20 साल से लोग नौकरी कर रहे हैं। इन्हें नियमित शिक्षकों की भांति वेतन भत्ते प्राप्त हो रहे हैं। नौकरी पर संकट खड़ा हो जाने के बाद इनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। शासन ने वर्ष 2000 के बाद तदर्थ शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए सभी अध्यापकों का वेतन रोकने का निर्देश जारी किया है।
75 तदर्थ शिक्षक बिना वेतन कर रहे काम
शासन की ओर से नियुक्ति पर रोक लगाने के बावजूद माध्यमिक विद्यालयों में तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति करने का सिलसिला चलता रहा। प्रबंधतंत्र नियुक्ति करता रहा तो नियुक्त शिक्षक कोर्ट जाकर वेतन आदेश पारित करवा लेते और डीआईओएस को वेतन देना पड़ता था। जिले में इस व्यवस्था के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 117 शिक्षक नियुक्त हुए। इसमें से 42 तदर्थ शिक्षकों को वेतन मिल रहा था। 75 तदर्थ शिक्षक बिना पूर्ण वेतन पाए शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
प्रबंधतंत्र की ओर से होती थीं नियुक्तियां
डीआईओएस उदय प्रकाश मिश्र ने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में जिस विषय में शिक्षक तैनात नहीं होते थे, उस विषय में प्रबंधतंत्र की ओर से तदर्थ शिक्षक की नियुक्ति कर ली जाती थी। इसमें नियम था कि आयोग से शिक्षक की तैनाती हो जाने के बाद तदर्थ शिक्षक की नौकरी स्वत: समाप्त हो जाएगी। यह व्यवस्था वर्ष 2000 में शासन ने खत्म कर दी थी। एक जनवरी 2000 के पहले जिले में नियुक्त हुए 13 शिक्षकों को विनियमित कर दिया था।