अमेठी। स्थानीय नगर पंचायत क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नगर वासियों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो सका। बजट के अभाव में शहर के दुर्गापुर रोड पर स्थित 1400 केएल क्षमता की बनी तीन पानी की टंकियां पिछलेे कई वर्षों से बंद पड़ी हैं। नगर क्षेत्र में जलापूर्ति बंद होने से करीब 30 हजार से अधिक की आबादी पेयजल की समस्या से जूझ रही है। शहर में रहने वाले लोग निजी हैंडपंप व बाहर से खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं।
स्थानीय नगर पंचायत एवं आसपास के लोग पिछलेे कई वर्षों से पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकारें आई और गईं, शिकायत के बावजूद लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाया। शहर के दुर्गापुर रोड के पास स्थित तीन पानी की टंकियां नगरवासियों के लिए बेकार साबित हो रही हैं। बताते चलें कि कई दशक पूर्व जलापूर्ति के लिए बनी पाइप लाइन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
करीब सात वर्षों से कनेक्शन शून्य हैं। वर्ष 2015 में बंद पड़ी जलापूर्ति शुरू कराने एवं मरम्मत के लिए चार करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। वर्ष 2016 और 2017 में दो किस्तों में पूरी धनराशि भी मिल गई। उक्त राशि से परसावां, बेनीपुर प्रथम और द्वितीय, आवास विकास के समीप स्थित नलकूप का रिबोर कराया गया था। जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन का विस्तार करते हुए 36 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जानी थी। जिसके सापेक्ष महज 17 किलोमीटर तक ही पाइप लाइन बिछाई जा सकी है।
परिसर में 500-500 केएल की दो टंकियां बनी थीं। इसके अलावा 400 केएल क्षमता की एक और नई टंकी का निर्माण कराने के साथ ही बाउंड्रीवॉल व अन्य निर्माण कराया गया। बावजूद इसके टंकी परिसर में स्थित नलकूप रिबोर की स्थिति में हैं। उनका रिबोर तक नहीं हो सका है। शहर के बाहर-बाहर 17 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछा दी गई लेकिन शहर के भीतर और टंकी से जोड़ने वाली पाइप लाइन नहीं पड़ सकी। जिसके चलते करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल सका। वर्ष 2017 के बाद बजट नहीं मिलने से अधूरा पड़ा कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।
पुरानी लाइनें ध्वस्त
नगरीय क्षेत्र का कार्यभार देख रहे सुल्तानपुर जल निगम के जेई आशीष वर्मा के अनुसार पुरानी पाइप लाइनें पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं। कहा कि बजट के अभाव में कार्य अधूरा पड़ा है। जो पाइप लाइन पड़ी है वह हेड से नहीं जुड़ सकी है। ऐसे में जलापूर्ति पूरी तरह बाधित है।
11.13 करोड़ का भेजा गया इस्टीमेट
जेई आशीष वर्मा ने बताया कि नगर क्षेत्र में जलापूर्ति सुचारु से शुरू कराने को लेकर इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया है। बताया कि 11.13 करोड़ रुपये की लागत से पाइप लाइन, राइजिंग मेन, हाउस कनेक्शन आदि का कार्य होगा। बजट मिलने के बाद ही जलापूर्ति हो सकेगी।
क्या कहते स्थानीय लोग
कसबा निवासी व्यवसायी डॉ. अजय कुमार अग्रहरि ने कहा कि करीब 20 वर्षों से पाइप लाइन ध्वस्त पड़ी है। जलापूर्ति बाधित होने से लोगों को खरीद कर पानी पीना पड़ रहा है। व्यवसायी नेता पवन अग्रवाल ने बताया कि स्वच्छ पेयजल के लिए बनी पानी की टंकियां महज शोपीस हैं। विभाग के अधिकारी पूरी तरह से उदासीन बने हैं। शिकायत के बावजूद नगर पंचायत में जलापूर्ति व्यवस्था जस की तस है। व्यापारी नेता हरिशंकर जायसवाल का कहना है करीब 30 हजार की आबादी कई वर्षों से पेयजल की समस्या का सामना कर रही है। कई सरकारें आईं और गईं लेकिन अभी तक समस्या का निस्तारण नहीं हो सका। डॉ. धनंजय सिंह का कहना है कि स्वच्छ पेयजल से ही लोग स्वस्थ रहेंगे, लेकिन शहर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था ही नहीं है। लोगों को निजी संसाधन एवं बाहर से स्वच्छ पेयजल खरीदकर पीना पड़ रहा है।