गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर बारिश के बीच खुले में पड़ी यूरिया। संवाद
अमेठी सिटी। किसानों को यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं गौरीगंज रेलवे स्टेशन स्थित रैक पर पहुंची करीब 26 हजार क्विंटल यूरिया लगातार बारिश में भीगती रही। सुरक्षित भंडारण के अभाव में खाद की गुणवत्ता प्रभावित होने और सरकारी नुकसान की आशंका पैदा हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भीगी यूरिया किसानों तक पहुंची तो उसके नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस पर जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं।
बोगियों से उतारने के बाद हजारों बोरियां खुले फर्श पर रख दी गईं। बुधवार रात से हो रही बारिश में कई बोरियों के नीचे से पानी बहता रहा, जबकि कुछ बोरियां खुली हालत में भी पड़ी रहीं। लगातार बारिश के बावजूद बोरियों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया, जिससे भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जिले की कई सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर यूरिया की किल्लत बनी हुई है। किसानों का कहना है कि एक ओर खाद के लिए भटकना पड़ रहा है, दूसरी ओर उपलब्ध यूरिया को भी सुरक्षित नहीं रखा जा रहा। यदि भीगी खाद का वितरण होता है तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि वितरण रोकने की स्थिति में खाद संकट और गहरा सकता है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह निरंजन ने बताया कि सूचना मिलने पर संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान भंडारण में लापरवाही या खाद के भीगने की पुष्टि होने पर जिम्मेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कहा कि खाद की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित कर जल्द वितरण कराया जाएगा।