गौरीगंज (अमेठी)। फसल समर्थन मूल्य योजना के तहत क्रय केंद्र पर धान बेचने के बाद 1279 किसान भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। 81 दिनों में 16,147 किसानों से 98,588 एमटी धान की खरीद छह एजेंसी के 68 क्रय केंद्रों ने की है। विपणन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक महज 77.10 फीसदी किसानों का भुगतान ही हो सका है। कुल मिलाकर शासन की ओर से 72 घंटे में किसानों को भुगतान का शासन की ओर से जारी निर्देश जिले में फ्लॉप साबित हो रहा है।
किसानों को उनकी उपज का निर्धारित समर्थन मूल्य दिलाने के लिए विपणन शाखा के 24, पीसीएफ के 27, यूपीसीयू के आठ, यूपीएसएस के सात तथा मंडी परिषद के दो क्रय केंद्रों पर खरीद की जा रही है। 81 दिनों में 16,147 किसानों से 98,588 एमटी धान की खरीद हुई है। खरीदे गए धान की कीमत एक अरब, 91 करोड़ 26 लाख 68 हजार 189 रुपये है।
खरीद के बाद क्रय केंद्र प्रभारी की ओर से 14,868 किसानों का डाटा पीएफएमएस पोर्टल पर सत्यापित होने के बाद उनके बैंक अकाउंट में ऑनलाइन भुगतान किया जा चुका है। 1229 किसानों की पीएफएमएस पोर्टल पर डाटा सत्यापन प्रक्रिया लंबित है तो विभिन्न कारणों से 50 किसानों का डाटा अमान्य किया जा चुका है।
सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने तथा डाटा अमान्य होने के चलते 1279 किसान क्रय केंद्र पर अपनी उपज बेचने के बाद भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। विपणन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक विपणन शाखा के क्रय केद्रों पर 83 प्रतिशत, पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर 65.14 प्रतिशत, यूपीसीयू के आठ क्रय केंद्रों पर 80.38 प्रतिशत, यूपीएसएस के सात क्रय केंद्रों पर 89.22 तथा मंडी परिषद के क्रय केंद्रों पर 66.86 प्रतिशत (जिले के 68 क्रय केंद्र पर फसल बेच चुके किसानों में 77.10 फीसदी) किसानों का भुगतान किया जा चुका है।
कुछ भी हो फसल बेचने के बाद किसान भुगतान का इंतजार कर रहे हैं तो जिम्मेदार व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पीएफएमएस पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने की बात कहते हुए सत्यापन होते ही धनराशि अंतरित होने की बात कह रहे हैं। सत्यापन के नाम पर भुगतान में हो रहा विलंब सरकार व जिला प्रशासन के 72 घंटे में भुगतान के दावों की पोल खोल रहा है।
लगातार किया जा रहा भुगतान
डिप्टी आरएमओ संतोष कुमार द्विवेदी ने स्रद्दद्म कि फसल समर्थन मूल्य योजना के तहत क्रय केंद्रों पर फसल बेचने के बाद लगातार भुगतान किया जा रहा है। पीएफएमएस पोर्टल पर बैंक अकांउट व आधार डाटा का सत्यापन होने के बाद प्वाइंट ऑफ परचेज मशीन से मिलान होने पर ही भुगतान की व्यवस्था बनाई गई है। बावजूद इसके डाटा सत्यापित होते ही किसानों के खाते में धनराशि अंतरित हो रही है। भुगतान से कोई किसान वंचित न हो इसके लिए नियमित निगरानी की जा रही है।