अमेठी सिटी। जिले में करीब 31 फीसदी गर्भवती खून की कमी से जूझ रही हैं। अप्रैल 2025 से अभी तक जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में 37,456 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें 10,780 गर्भवतियों में सामान्य से कम खून मिला तो वहीं 1006 गर्भवतियों में हीमोग्लोबिन का स्तर सात डेसी लीटर से भी कम मिलने पर उन्हें हाईरिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में शामिल किया गया है। इनकी अतिरिक्त देखभाल की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के साथ ही गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल को लेकर तमाम कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए हर माह की नौ, 16 और 24 तारीख को सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए शिविर आयोजित होता है। प्रसव पूर्व खून आदि की जांच कर उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है।
गर्भवती में सामान्यत: हीमोग्लोबिन का स्तर न्यूनतम 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए, लेकिन जांच के दौरान गर्भवतियों में खून की कमी मिल रही है। जिले में गर्भवतियों की जांच में 11786 में खून की कमी ज्यादा मिली है। खानपान व इलाज पर ध्यान नहीं देने की वजह से नवजातों में भी इसका असर हो सकता है। एसीएमओ डॉ. पीके उपाध्याय ने बताया कि खून की कमी मिलने पर गर्भवतियों को दवाओं के साथ पौष्टिक आहार लेने का सुझाव दिया जाता है। साथ ही समय-समय पर जांच कराने आदि के लिए प्रेरित किया जाता है।
ऐसे दूर करें खून की कमी
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. पुलक यादव ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम का सेवन करना चाहिए। प्रोटीन के लिए दाल का सेवन बढ़ाना चाहिए। हरी सब्जियां, चुकंदर, गाजर, फल आदि को आहार में शामिल करने से खून की कमी दूर की जा सकती है।
खून की कमी के चलते होने वाली परेशानियां
थकान महसूस होने के साथ ही चक्कर आने व ठंड लगने की परेशानी होती है। इसके साथ ही खून की कमी से सांस लेने में दिक्कत होने के साथ ही चेहरा पीला पड़ने, सिर दर्द होने व दिल की धड़कन तेज होने के साथ भूख न लगने व चिड़चिड़ापन की शिकायत होती है।