अंबेडकरनगर। मरीजों के लिए लाइफ लाइन कही जाने वाली एंबुलेंस सेवा के पहिये सोमवार को ठप हो गए। दरअसल ठेका प्रथा को समाप्त करने और एंबुलेंस कर्मियों को नियमित किए जाने की मांग को लेकर एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। नतीजा यह रहा कि जिले में 102 व 108 सेवा समेत एएलएस की कुल 56 एंबुलेंस के सापेक्ष 40 एंबुलेंस जहां-तहां खड़ी हो गईं। जो 16 एंबुलेंस संचालित भी हुईं, उन्होंने विशेष इमरजेंसी में ही मरीजों को अस्पताल लाने व ले जाने का कार्य किया। बड़ी संख्या में एंबुलेंस के पहिये ठप हो जाने से मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उधर, सोमवार को कलेक्ट्रेट के निकट धरने पर बैठे एंबुलेंस कर्मचारियों ने हक की आवाज बुलंद की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ठेका प्रथा को समाप्त किए जाने, एंबुलेंस कर्मियों को नियमित किए जाने, कोरोना संकट के बीच जान गंवाने वाले एंबुलेंस कर्मियों के परिवारीजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कलेक्ट्रेट के निकट चल रहे एंबुलेंस कर्मचारियों के धरने का असर सोमवार को दिखा। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मरीजों के लिए लाइफ लाइन कही जाने वाली एंबुलेंस सेवा लगभग पूरी तरह से ठप हो गई। जिले में कुल 56 एंबुलेंस हैं। इनमें 108 सेवा की 22, 102 सेवा की 30 व 4 एएलएस एंबुलेंस शामिल हैं।
वैसे तो मांगों को लेकर कर्मियों का धरना बीती 23 जुलाई से ही चल रहा है, लेकिन सोमवार को पूरी तरह से कार्य का बहिष्कार कर दिया। सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही इमरजेंसी मरीजों को अस्पताल लाने व ले जाने का कार्य किया गया। 56 एंबुलेंस के सापेक्ष 40 एंबुलेंस हड़ताल के चलते जहां-तहां खड़ी हो गईं, जबकि 16 एंबुलेंस ही विशेष परिस्थितियों में संचालित हुईं। इनसे विशेष इमरजेंसी में ही मरीजों को अस्पताल लाने व ले जाने का काम किया गया। बड़ी संख्या में एंबुलेंस के पहिये ठप हो जाने से मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
धरने पर डटे कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज
प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर एंबुलेंस कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट के निकट धरना देकर अधिकार की आवाज बुलंद की। अध्यक्षता कर रहे सूर्यप्रकाश ने कहा कि लंबे समय से एंबुलेंस कर्मचारी विभिन्न प्रकार की मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। ठेका प्रथा समाप्त किए जाने की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो एंबुलेंस कर्मियों को नियमित भी नहीं किया जा रहा है। इससे एंबुलेंस कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना संकटकाल में भी एंबुलेंस कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया। संकट के बीच जिन एंबुलेंस कर्मचारियों की जान चली गई, उनके परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग को भी पूरा नहीं किया जा रहा है। इस प्रकार की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस मौके पर शेषराम चौधरी, रमाकांत, प्रेमनाथ, सूर्यप्रकाश, आलोक, स्नेहलता, सीमा, राकेश पाल आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी में 16 एंबुलेंस का हुआ संचालन
जिले में कुल 56 एंबुलेंस हैं। विभिन्न मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मचारियों ने हड़ताल कर रखी है। इसके चलते 40 एंबुलेंस का संचालन सोमवार को नहीं हो सका। हालांकि मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए विशेष इमरजेंसी में 16 एंबुलेंस का संचालन किया गया।
- अमित कुमार, एंबुलेंस प्रोग्राम मैनेजर