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स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से महिला मरी, हंगामा

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जानकारी के मुताबिक 16 जून को 11 बजे जलालपुर थाना क्षेत्र के चांड़ीडीह गांव निवासी सुनीता (28) पत्नी अनिल को प्रसव पीड़ा के बाद जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। मंगलवार रात लगभग साढ़ आठ बजे जिला अस्पताल की डा. रोली द्विवेदी ने उसका आपरेशन किया।  उसे बेटा पैदा हुआ था।
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सुबह होते ही अचानक सुनीता की तबियत खराब होने लगी। उसके  पेट में तेज दर्द होने लगा। परिवारीजनों के मुताबिक उन्होंने चिकित्सकों को कई बार फोन किया। उनसे यह भी बताया कि सुनीता की तबियत काफी गंभीर होती जा रही है। इसके बाद भी कोई चिकित्सालय कर्मी नहीं आया।

छह बजे एक स्टाफ नर्स ने इंजेक्शन लगाया। इसके 20 मिनट बाद ही उसकी मौत हो गई। इस पर एक तरफ जहां रोना पीटना मच गया, वहीं परिवारीजनों में चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही को लेकर आक्रोश फैल गया। परिवारीजनों व साथ आए ग्रामीणों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
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उनका आरोप था कि रात्रि में मरीजों का इलाज का राम भरोसे रहता है। वार्ड में कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहता। उनका कहना था कि स्टाफ नर्स ने सुचारु देखभाल के उनसे एक हजार रुपये भी लिए थे। इसके बाद भी इलाज में लापरवाही बरती गई। परिवारीजनों वार्ड से शव उठाने से इंकार कर दिया।

कहा कि जब तक संबंधित चिकित्सक व स्टाफ नर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती तब वह शव को नहीं ले जाएंगे। इस बीच हंगामे की सूचना मिलने पर अकबरपुर पुलिस भी जिला चिकित्सालय पहुंच गई और परिजनों को समझा बुझाकर मामला शांत कराया।

परिवारीजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। पुलिस ने आश्वस्त किया कि मामले की छानबीन कराई जाएगी। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई, तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस पर परिवारीजन शव लेकर चले गए। उधर सीएमएस डा. आरके पटेल ने इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही बरते जाने से इंकार किया। कहा कि यदि पोस्टमार्टम होता, तो मौत की सही जानकारी होती।
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