जिले के शहरी क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति ठीक नहीं है। हालत यह है कि प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी प्रतिदिन मिलना चाहिए, लेकिन 70 लीटर पानी ही लोगों को मिल पा रहा है। इसमें भी जर्जर पेयजल पाइप लाइन आए दिन किसी न किसी क्षेत्र में नागरिकों के लिए मुसीबत का सबब बनी रहती हैं।
जहां तहां पाइप लाइन फटने से न सिर्फ कई क्षेेत्रों की आपूर्ति रुक जाती है, वरन दूषित पानी की आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में होने लगती है। नगर के कई जगहों पर पानी की टोटी टूट जाने के बाद भी उसे दुरुस्त नहीं कराया जाता, जिसके चलते पानी आपूर्ति के समय लगातार बहकर बर्बाद होता रहता है।
नागरिकों का मानना है कि जब तक जर्जर पाइप लाइन बदली नहीं जाएगी, और जनरेटर का सहारा नहीं लिया जाएगा, तब तक बेहतर आपूर्ति संभव नहीं होगी।
गर्मी का मौसम शुरु होने के साथ ही पेयजल आपूर्ति का संकट जिले में गहराने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ताल तलैया लगातार सूख रहे हैं, और नलों से पानी निकलने में कठिनाई होने लगी है, वहीं जिला मुख्यालय की स्थिति भी ठीक नहीं है।
अकबरपुर नगर की लगभग 60 हजार आबादी को पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए कुल 5 ओवरहेड टैंक स्थापित हैं। इन टैंकों में पानी की उपलब्धता तय करने के लिए 9 नलकूपों की स्थापना भी की गई है। हालांकि आबादी के अनुपात में नगर क्षेत्र में अभी कम से कम पांच और ओवरहेड टैंक की जरूरत बनी हुई है।
नगर के इंद्रलोक कालोनी, शास्त्रीनगर, कृष्णानगर व मीरानपुर आदि जगहों पर एक एक नए ओवरहेड टैंक की आवश्यकता है। नगर के विस्तारीकृत क्षेत्रों में भी पानी की टंकी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इन सब के बीच पालिका प्रशासन यूं तो उपलब्ध संसाधनों के बूते समुचित आपूर्ति का प्रयास कर रहा है, लेकिन संसाधनों का संकट आड़े आ रहा।
हालत यह है कि मानकों के अनुरूप प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी दिए जाने की जरूरत है, लेकिन पालिका प्रशासन सिर्फ 70 लीटर पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। ऐसे में जाहिर है कि लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी नहीं मिल पा रहा है।
अन्य मौसम में तो लोगों की जरूरतें तो किसी तरह पूरी हो जाती हैं, लेकिन गर्मी में पानी की यह किल्लत कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगती है। नगर परिषद द्वारा पर्याप्त पानी न दिए जाने के कारण गर्मी में अक्सर लोगों को निजी हैंडपंपों का सहारा लेने को विवश होना पड़ता है। कई मोहल्लों में हैंडपंप कम होने की वजह से लाइन भी अक्सर दिखाई पड़ती है।
इसके अलावा पेयजल पाइपलाइन के जर्जर हो जाने का खामियाजा भी नगर क्षेत्र के उपभोक्ताओं को झेलना पड़ रहा है। कई बार वाहनों का दबाव पड़ने या फिर पानी का प्रेशर बढ़ने के चलते पाइपलाइन जवाब दे जाती है।
इससे एक तरफ जहां क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के जरिए दूषित आपूर्ति का संकट बढ़ जाता है, वहीं कई आगे के क्षेत्रों में पानी का आपूर्ति भी ठप हो जाता है। नगर क्षेत्र में कई जगह पानी की टोटी के टूट जाने के बाद उसे जल्दी बदले जाने की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता।
इससे भी हजारों लीटर पानी प्रतिदिन यूं ही बर्बाद हो जाता है। इसे रोक कर कई घरों में सुचारु पेयजल आपूर्ति हो सकती है, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ऐसा नही हो पा रहा है।