राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर सरयू नदी पर दिखने लगा है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 33 सेंटीमीटर बढ़कर 83.63 मीटर पहुंच गया। हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान 85.56 मीटर से 1.93 मीटर नीचे है, लेकिन इटौरा ढोलीपुर और सराय हंकार के पास खेतों में कटान शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
राजेसुल्तानपुर के माझा कम्हरिया गांव के पास नदी का पानी धीरे-धीरे फैलने लगा है। कटान की शुरुआत होते ही किसानों ने प्रशासन को सूचना दी। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में तालुकदार सिंह, राघवेंद्र सिंह, जनार्दन सिंह, जितेंद्र यादव, राम सुमेर, गोमती गौड़ और स्वर्णजीत सिंह समेत दर्जनों किसानों की जमीन नदी में समा चुकी है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित आराजी देवारा, मांझा कम्हरिया और कम्हरिया क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कम्हरिया निवासी लक्ष्मण निषाद ने बताया कि फिलहाल गांवों में कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो नदी का पानी ऊपरी क्षेत्रों की ओर फैलने लगेगा। एसडीएम सुभाष सिंह धामी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
कटान स्थल का जेई ने किया निरीक्षण
किसान भावेश सिंह गंगे की सूचना पर बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के जेई फागू चौहान ने कटान स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जहां कटान हो रही है, वहां जल्द बंबू क्रेट लगाकर सुरक्षा कार्य कराया जाएगा।
7 वर्षों में 800 बीघे से अधिक जमीन समाई
कम्हरिया, मांझा कम्हरिया, इटौरा ढोलीपुर और सराय हंकार क्षेत्र के 50 से अधिक किसानों की 800 बीघे से ज्यादा कृषि भूमि पिछले छह-सात वर्षों में सरयू की कटान में समा चुकी है। किसानों का कहना है कि बंबू क्रेट, ट्री स्पर और परक्यूपाइन जैसे अस्थायी कार्यों से सीमित राहत मिलती है, लेकिन स्थायी तटबंध और बोल्डर पिचिंग की मांग पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।