अंबेडकरनगर। बसंत पंचमी का पर्व गुरुवार को पूरे जिले में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रत्येक माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसमें भगवान विष्णु तथा माता सरस्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। इस दिन से ऋतुराज बसंत के आगमन को भी माना जाता है व होलिकोत्सव की शुरुआत भी होती है। शाम होने के साथ ही होलिका दहन स्थलों पर रेड़ के पेडों को अन्य लकड़ियों को साथ रखते हैं। लगभग एक माह 10 दिन बाद होलिका दहन के साथ ही होली पर्व भी मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के मौके पर विभिन्न विद्यालयों व मंदिरों में भव्य हवन पूजन किया गया।
बसंत पंचमी का पर्व गुरुवार को जिले में श्रद्धा व उत्साहपूर्वक मनाया गया। सुबह से ही घरों व मंदिरों में चहल पहल देखने को मिली। अकबरपुर नगर के गायत्री मंदिर, दुर्गा मंदिर, शहजादपुर शिवालय व रामजानकी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गायत्री मंदिर में पुरोहित विद्यासागर पांडेय ने सैकड़ों महिला व पुरुष श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से हवन पूजन कराया। कहा कि इस दिन पूजन अर्चन करने से श्रद्धालुओं को अक्षुण्य फल मिलता है। आयोजन में तुलसीराम त्रिपाठी, उमाशंकर शर्मा, अरुण अग्रहरि, अंकुर प्रसाद मिश्र व ओमप्रकाश आदि शामिल रहे। शहजादपुर फौव्वारा स्थित आर्य समाज मंदिर में आदित्य आर्य, शनि, राजेश सोनी, ज्ञानप्रकाश आर्य, विनोद कुमार मद्धेशिया व गिरिजाशंकर आदि ने हवन पूजन किया।
अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर घर, परिवार व समाज की बेहतरी के लिए प्रार्थना की। विद्यालयों में मां सरस्वती की आराधना हुई। इसमें छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की। शिक्षकों ने छात्र छात्राओं को बसंत पंचमी पर्व की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि यह दिन कई मायनों में खास है। जिला मुख्यालय के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बसंत पंचमी पर कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी। शाम होने के साथ ही शहर से लेकर गांवों तक में होलिका लगाने की परंपरा का निर्वहन हुआ। इसमें बुजुर्गोँ व युवाओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की।
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार बसंत पंचमी के मौके पर सरयू की जलधारा में स्नान कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। नगर में भोर से ही लोगों ने सरयू की जलधारा में डुबकी लगाना शुरू किया, जो अपराह्न तक चलता रहा। इस पर्व पर मठ मंदिरों में जाकर लोगों ने इष्ट देवता व मां सरस्वती का श्रद्धापूर्वक पूजन अर्चन किया। नगर के प्राचीन श्रीउदासीन आश्रम हनुमान मंदिर मीरानपुर में मां दुर्गा, मां सरस्वती, वीर हनुमान जी महाराज, राधा कृष्ण का भव्य श्रृंगार हुआ।
विद्या की देवी मां सरस्वती के इस महापर्व पर सरस्वती शिशु मंदिर, बाबा राम शरण दास बालिका इंटर कॉलेज मखदूमनगर, बीआरएचडी गर्ल्स स्कूल शंकरगढ़ अलीगंज, सतगुरु दयाल दास सनातन संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टांडा, लालता प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज मुबारकपुर में विधि विधान के साथ यज्ञ हवन के साथ पूजन अर्चन हुआ। बसंत पंचमी पर्व पर क्षेत्र में परंपरागत ढंग से होलिका दहन स्थल पर कलात्मक रंगोली बनाकर विधि विधान के साथ रेड़ पेड़ को लगाया गया।
बसंत पंचमी की पावन तिथि को लेकर कई महत्ता है। गोविंदपुर अटिका के पं. कृष्णमोहन तिवारी बताते हैं कि एक पौराणिक कथा के अनुसर भगवान विष्णु की आज्ञा से प्रजापति ब्रह्माजी सृष्टि की रचना करने के बाद पृथ्वी पर आए। उन्हें चारों ओर का वातावरण सुनसान तथा निर्जन दिखाई पड़ता है। उदासी से सारा वातावरण मूक सा हो गया था। इस उदासी और मलीनता को दूर करने के लिए ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से अभिमंत्रित जल छिड़का। उन जल कड़ों के वृक्ष पर पड़ते ही चार भुजाओं वाली एक शक्ति की उत्पत्ति हुई, जो अपने दोनों हाथों से वीणा बजा रही थीं, और अन्य हाथों में पुस्तक तथा माला धारण किए हुए थी।
ब्रह्माजी ने उनसे वीणा बजाकर सृष्टि की उदासी को दूर करने के लिए कहा। उस दिन देवी मां ने वीणा बजाकर सभी जीवों को वाणी प्रदान किया। इसके बाद इन्हीं देवी का नाम वीणावादिनी सरस्वती पड़ा। यह देवी विद्या और बुद्धि को देने वाली हैं। इसलिए हर घर में इस दिन मां सरस्वती का पूजन अर्चन की जाती है। इसी तिथि से बंसत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस तिथि को स्थापित हुई होलिका को करीब 1 माह 10 दिन बाद दहन किया जाता है। इसके अगले दिन आपसी प्रेम और सौहार्द के प्रतीक होली के त्यौहार को मनाए जाने की परंपरा है।