मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
सऊदी अरब में आजीविका कमाने गए मजदूरों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहां फंसे मजदूर और यहां उनके परिजन, दोनों ही सुरक्षित घर वापसी के लिए सरकार की ओर ताक रहे हैं। जब तक उनकी वापसी सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इन परिवारों के लिए चैन की रोटी नसीब होना मुश्किल लग रहा है।
अकबरपुर जिला मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित अमिया बामनपुर गांव के हृदेश कुमार वहां गंभीर संकट में हैं। उनके पिता राममिलन ने बताया कि हृदेश घर लौटना चाहते हैं, लेकिन कंपनी ने उनका पासपोर्ट अपने पास जमा कर रखा है। इसी गांव के संतोष की स्थिति भी चिंताजनक है।
परिजनों के अनुसार, शुरुआत के एक-दो महीने तो सब ठीक रहा और उन्होंने पैसे भी भेजे, लेकिन धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए। आज स्थिति यह है कि मजदूरों के पास भोजन तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे हैं। परिजनों की करुण पुकार है कि जब वहां कमाई ही नहीं हो रही, तो उन्हें हर हाल में वापस लाया जाए। हृदेश कुमार के घर में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा पत्नी और दो छोटे बच्चे (12 और 8 वर्ष) उनकी राह देख रहे हैं। वहीं संतोष के परिवार में माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चे हैं, जिनका भरण-पोषण संतोष के भरोसे ही था।
सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन (बजरंगी भाईजान) ने सऊदी अरब में फंसे मजदूरों से फोन पर सीधे बातचीत की। मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए उनसे मदद की अपील की है। आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और जेद्दा (सऊदी अरब) स्थित भारतीय दूतावास को प्रेषित कर दी है।