आलापुर (अंबेडकरनगर)। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आते ही छात्र-छात्राओं की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जीव विज्ञान ऐसा विषय है, जिसमें तथ्यात्मक ज्ञान के साथ अवधारणाओं की स्पष्ट समझ और सही उत्तर लेखन शैली बेहद जरूरी मानी जाती है। इसी क्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज की जीव विज्ञान प्रवक्ता शशि बाला पांडेय ने परीक्षा उपयोगी दिशा-निर्देश साझा किए।
उन्होंने बताया कि जीव विज्ञान रटने की बजाय समझ पर आधारित विषय है। विद्यार्थी प्रत्येक अध्याय की मूल अवधारणाओं को गहराई से समझें और आरेखों के माध्यम से अध्ययन करें, तो जटिल विषय भी सरल हो जाते हैं। अवधारणाओं की स्पष्टता से उत्तर प्रभावी बनते हैं और बेहतर अंक प्राप्त करने की संभावना बढ़ती है। परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जनन, आनुवंशिकी, विकास, पारिस्थितिकी और जैव प्रौद्योगिकी को महत्वपूर्ण अध्याय बताया, जिनसे हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। विद्यार्थियों को इन इकाइयों की परिभाषाएं, प्रक्रियाएं और आरेख विशेष रूप से तैयार रखने की सलाह दी। तैयारी के लिए एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक को मुख्य आधार बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परिभाषाएं, कारण-परिणाम, अंतर बताइए जैसे प्रश्नों और जैविक प्रक्रियाओं को संक्षेप में अलग नोटबुक में लिखने से अंतिम समय में दोहराव आसान होता है और त्रुटियों की संभावना कम रहती है। वहीं, जीजीआईसी तेंदुआईकला की जीव विज्ञान शिक्षिक विभा राॅय ने कहा कि साफ-सुथरे, सही अनुपात और उचित लेबल वाले आरेख उत्तर को आकर्षक बनाते हैं और मूल्यांकन के दौरान अतिरिक्त अंक दिलाने में सहायक होते हैं। जहां भी संभव हो, आरेख अवश्य बनाएं। उत्तर बिंदुओं में, क्रमबद्ध और स्पष्ट भाषा में लिखे जाएं। वैज्ञानिक शब्दावली की सही वर्तनी, साफ लिखावट और उपयुक्त शीर्षक-उपशीर्षक उत्तर की गुणवत्ता को और बेहतर बनाते हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन पर भी जोर दिया। पहले आसान प्रश्न हल करें, आरेख वाले प्रश्नों के लिए पर्याप्त समय रखें और अंत में 10 से 15 मिनट उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए अवश्य बचाएं। साथ ही, पिछले पांच वर्षों के प्रश्नपत्र और मॉडल पेपर हल करने से प्रश्नों के पैटर्न को समझने में मदद मिलती है।