मंगलवार को सात घंटे से अधिक विद्युत कटौती से जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतें हुईं। उमस भरी भीषण गर्मी के कारण लोग पूरे दिन परेशान रहे। बिजली जाने से उद्योग धंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। लोगों का कहना था कि जर्जर हो चुके उपकरणों के सहारे विद्युत आपूर्ति किए जाने का ही आए दिन आम उपभोक्ताओं को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी विद्युत आपूर्ति मंगलवार को बेपटरी होने से ग्रामीणों में पावर कॉरपोरेशन के प्रति आक्रोश है। अघोषित विद्युत कटौती एवं जर्जर हो चुके विद्युत उपकरणों का प्रतिकूल प्रभाव आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। मंगलवार को जर्जर हो चुके उपकरणों में आई खराबी का दंश विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा।
सोमवार रात नौ बजे से देर रात 12 बजे व मंगलवार भोर चार बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक विद्युत कटौती के बाद आमजन को उम्मीद थी कि अब उन्हें सुचारु बिजली उपलब्ध होगी। सुबह नौ बजे जिला मुख्यालय सहित कई अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। पहले तो लोगों ने इसे आम दिनों की तरह कटौती समझा, लेकिन जब दोपहर 12 बजे के बाद भी बिजली नहीं आई, तो उपभोक्ताओं में बेचैनी व्याप्त होने लगी।
बिजली आने का इंतजार करते करते दोपहर के ढाई बज गए। जब बिजली नहीं आई, तो संबंधित अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे। पहले तो कोई जानकारी नहीं दी गई, लेकिन बाद में बताया गया कि सुल्तानपुर जनपद से विद्युत आपूर्ति ठप है। विद्युत उपकेंद्र में आई खराबी ठीक की जा रही है। शाम करीब चार बजे जब बिजली आई। हालांकि इसके बाद भी कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में व्यवधान का दौर जारी रहा।
उपभोक्ताओं का कहना था कि पहले ही जर्जर हो चुके उपकरणों को ठीक कर दिया गया होता, तो इस प्रकार से बदतर विद्युत आपूर्ति का दंश न झेलना पड़ता। अकबरपुर के उपभोक्ता रामनयन, घनश्याम, श्यामजी यादव, अरविंद तिवारी, रईस खां, शहाब परवेज, अनुराग श्रीवास्तव व अंगद सिंह ने कहा कि भीषण गर्मी में बदतर विद्युत आपूर्ति के कारण विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
प्रशासन व पावर कॉरपोरेशन का जितना ध्यान विद्युत कनेक्शन देने व बकाया वसूली में रहता है, उतना ध्यान जर्जर हो चुके विद्युत उपकरणों को बदलने में लगा दें, तो बिजली की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति में सुधार न हुआ, तो सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।