अंबेडकरनगर। गोरखपुर प्रकरण में स्वाट और सर्विलांस टीम पर आरोप लगने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले आजमगढ़ के एक व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में वर्ष 2021 में हत्या की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है जो न्यायालय में विचाराधीन है।
गोरखपुर के पिपराइच क्षेत्र के चकिया निवासी व्यवसायी श्रवण कुमार निषाद की पत्नी दीपशिखा ने पति को छोड़ने के एवज में उनसे 10 लाख रुपये की मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला तब प्रकाश में आया जब 10 जुलाई की देर रात अंबेडकरनगर और गोरखपुर की एसओजी टीमों के बीच एक व्यवसायी को ले जाने के लिए भिड़ंत हुई थी।
इस घटना के बाद एसपी प्राची सिंह ने रविवार देर शाम तत्काल कार्रवाई करते हुए स्वाट प्रभारी स्वाट टीम प्रभारी अजीत कुमार पांडेय, मुख्य आरक्षी महेश प्रताप सिंह, सर्विलांस सेल के मुख्य आरक्षी मनीष कुमार और लल्लू यादव को लाइन हाजिर कर दिया। इन गंभीर आरोपों के बाद आमजन के बीच पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
इससे पहले 26 मार्च 2021 को आजमगढ़ जिले के रहने वाले जियाउद्दीन की पुलिस कस्टडी में मौत के प्रकरण में भी स्वाट टीम के प्रभारी सहित आठ सिपाहियों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मृतक के परिजनों ने पुलिस की प्रताड़ना से मौत का आरोप लगाया था। तत्कालीन एसपी आलोक प्रियदर्शी ने कार्रवाई करते हुए स्वाट टीम के प्रभारी देवेंद्र पाल सिंह सहित आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब राजेसुल्तानपुर के ठगी के मामले में पहले एसओजी टीम का स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना व्यापारी को उठाया जाना, फिर गोरखपुर की एसओजी टीम ने कहासुनी और हाथापाई के मामले ने खूब किरकिरी कराई है।