अंबेडकरनगर। पिछले आठ दिनों में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दो दरोगाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इनमें एक पर रंगदारी वसूलने और एक पर जालसाजी करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कोर्ट के आदेश के बाद भी मामला विभाग से जुड़ा होने के कारण अधिकारी मुकदमा लिखाने से से गुरेज कर रहे हैं। इससे विभाग की छवि दागदार हो रही है।
अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित कताई मिल के निदेशक अंकित पांडेय से पुलिस चौकी मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में तैनात रहे एसआई जितेंद्र सिंह ने 30 हजार रुपये हफ्ता मांगा था। रुपये न देने पर अंकित के कार्यालय पहुंचकर मैनेजर व अन्य लोगों के साथ बदसलूकी करते हुए फर्जी मुकदमे में फंसाकर बर्बाद करने की धमकी तक दे डाली थी। वर्तमान में दारोगा की तैनाती थाना बसखारी क्षेत्र में हैं।
पुलिस अधिकारियों के कार्रवाई न करने पर पीड़ित ने न्यायालय से गुहार लगाई थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने चार फरवरी को मामले में सुनवाई पूरी करते हुए सीओ टांडा को दरोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और एक सप्ताह में इसकी सूचना न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं कराया गया।
अभी यह मामला सुर्खियों में बना ही था कि इसी बीच एक और दारोगा की कारगुजारी सामने आ गई। थाना जहांगीरगंज क्षेत्र के नरियांव गांव निवासी प्रेमचंद का ड्राइविंग लाइसेंस करीब आठ माह पूर्व उसके फूफा जयराम व इनके पुत्र संदीप ने ले लिया था। दारोगा विजय कुमार यादव ने जयराम, संदीप और एक अन्य की मिलीभगत से सात मई 2024 को हुई दुर्घटना के मामले में प्रेमचंद को बाइक का चालक दिखाकर उसे आरोपी बना दिया। बीमा कंपनी से अनुचित लाभ लेने के इरादे से जालसाजी को अंजाम दिया गया था।
कोर्ट से समन मिलने के बाद प्रेमचंद मामले की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए। इस पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दारोगा समेत चार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीओ आलापुर को आदेश दिया है। फिलहाल अभी पुलिस अधिकारी इस मामले में भी आदेश न मिलने की बात कह रहे हैं।
वर्जन,
की जा रही कार्रवाई
अनुशासनहीनता करने वाले पुलिसकर्मियाें पर कार्रवाई की जा रही है। इन मामलों में भी विभागीय जांच कराई जाएगी।
श्याम देव, एएसपी