राजेसुल्तानपुर। सरयू नदी का जलस्तर रविवार को आठ सेंटीमीटर कम हुआ है। इससे माझा क्षेत्र के किसानों को कटान से कुछ राहत मिली है। हालांकि, नदी के लगातार बदलते मिजाज के कारण प्रशासन और बाढ़ कार्य खंड की टीमें पूरी तरह सतर्क हैं। इटौरा ढोलीपुर के पास कटान रोकने के लिए कार्य शुरू किया गया है।
बाढ़ कार्य खंड के अनुसार, रविवार को सरयू नदी का जलस्तर 83.23 मीटर से घटकर 83.15 मीटर पर पहुंच गया। जलस्तर में कमी आने से कटान की रफ्तार धीमी हुई है। किसान अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। उनका कहना है कि नदी का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है। इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी छोर पर कटान प्रभावित स्थल पर जेसीबी मशीन से समतलीकरण कराया जा रहा है। इसके बाद यहां बैंबू क्रेट लगाकर नदी की धारा को नियंत्रित करने का प्रयास होगा। बाढ़ कार्य खंड के जूनियर इंजीनियर फागू चौहान ने बताया कि जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है। कटान कम हुआ है और बैंबू क्रेट लगाने की तैयारी चल रही है।
कटान रोकने के नाम पर खानापूरी का आरोप
इटौरा ढोलीपुर निवासी तालुकदार सिंह ने कटान रोकने के नाम पर हुए कार्यों में सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार की करीब 200 बीघा कृषि भूमि सरयू की धारा में समा चुकी है। स्थायी बचाव के लिए प्रभावी कार्य नहीं हुए हैं। ग्रामीण राघवेंद्र का कहना है कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए कम्हरिया घाट पर पुल बनने के बाद नदी की धारा बदल गई है। उनका आरोप है कि पुल के पिलरों की स्थिति के कारण नदी का बहाव कम्हरिया की ओर मुड़ गया। इससे कटान पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।
डेढ़ दर्जन गांवों पर पड़ रहा असर
सरयू के बढ़ते-घटते जलस्तर का असर करीब डेढ़ दर्जन गांवों पर पड़ रहा है। इनमें उल्टहवा माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ, फूलपुर और डुहिया शामिल हैं। प्रशासन इन सभी गांवों पर विशेष नजर रख रहा है। बाढ़ चौकियां सक्रिय होने से स्थिति पर नियंत्रण रखने में मदद मिल रही है। तटबंधों की निरंतर निगरानी से किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की तैयारी है।
जलस्तर पर है पैनी नजर
प्रशासन की ओर से बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। तटबंधों की निगरानी लगातार की जा रही है। टांडा क्षेत्र में बाढ़ या कटान का तत्काल खतरा नहीं है। फिर भी विभाग की टीमें नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। - धीरेंद्र कुमार, अवर अभियंता बाढ़ खंड