अंबेडकरनगर। शहर के बीच से बहने वाली तमसा नदी के पानी को आबादी क्षेत्र से निकलने वाले करीब एक दर्जन नालों का गंदा पानी प्रदूषित कर रहा है।
इसका सीधा खामियाजा नदी के जलीय जीव जंतुओं के साथ ही तट पर बसी करीब 10 हजार की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। नाले के गंदे पानी को सीधे नदी में प्रवाहित न किए जाने के एनजीटी सख्त निर्देश के बाद भी इसके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार अफसर इसके अनुपालन को लेकर उदासीन हैं।
नगर पालिका अकबरपुर के 25 वार्ड में 30 हजार मकान हैं। इनमें सवा लाख की आबादी निवासी करती है। हर दिन इन घरों से एक लाख एमएलडी से अधिक गंदा पानी छोटे-बड़े आधा दर्जन से अधिक नालों के माध्यम से तमसा नदी में गिराया जा रहा है।
एनजीटी की सख्ती के बाद निकाय प्रशासन नगर के आधा दर्जन से अधिक नालों पर बॉयो रेमेडिएशन विधि से नालों के गंदे पानी को साफ करने का दावा तो कर रहा है लेकिन मीरानपुर से निकलने वाले शहर के सबसे बड़े नाले के पानी को साफ करने के लिए निकाय के पास कोई व्यवस्था नहीं है। यह नाला अकेले ही तमसा नदी के पानी को प्रदूषित करने के लिए काफी है।
प्रदूषित पानी से मंडरा रहा बीमारी का खतरा
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि प्रदूषित पानी का उपयोग पेयजल के बतौर करने से उल्टी-दस्त, डायरिया के साथ अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराता रहता है। नदी तट किनारे बसी दस हजार की आबादी इसी पानी का इस्तेमाल खाना पकाने, फल सब्जियों को धोने, बर्फ बनाने आदि में इस्तेमाल करने से भी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है।
शहर के छह नालों के पानी को बॉयो रेमेडिएशन विधि से साफ किया जा रहा है। मीरानपुर नाले के पानी को साफ करने के लिए जल्द ही प्रबंध कराया जाएगा। पूर्व में नाले के पानी को साफ करने के लिए विशेष पेड़ लगवाए गए थे। जो अब क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
बीना सिंह, ईओ नगर पालिका, अकबरपुर