अंबेडकरनगर में कड़ी धूप से बचती हुई स्कूल जातीं युवतियां।
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चैत्र में ही जेठ का अहसास लोगों को होने लगा है। दिन-प्रतिदिन सूर्य का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रात के साथ-साथ दिन के तापमान में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रचंड गर्मी में न सिर्फ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल का संकट खड़ा हो गया है बल्कि छात्र-छात्राओं के समक्ष भी मुश्किलें खड़ी होने लगी हैं।
भीषण गर्मी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है। सूर्य का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। सुबह होते ही धूप की तपिश बढ़ जाती है। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जाता है, धूप की तल्खी भी बढ़ती जाती है।
लगातार बढ़ती तपिश को देखते हुए चैत्र में ही लोगों को जेठ का अहसास होने लगा है। भीषण गर्मी के चलते सुबह 10 बजे के बाद से ही जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी-बड़ी बाजारों में सन्नाटा पसरने लगता है। इतना ही नहीं, भीषण गर्मी से न सिर्फ जिला मुख्यालय बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट खड़ा हो गया है।
एक-एक बाल्टी शुद्ध पेयजल के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। साधारण हैंडपंप ने पानी देना छोड़ दिया है तो ज्यादातर इंडिया मार्का हैंडपंपों भी खराब होने लगे हैंै। तालाब में धूल उड़ रही है तो राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं।
अकबरपुर के रामकृपाल व जगन्नाथ ने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए आमजन को सुचारु पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। न सिर्फ खराब पड़े हैंडपंपों को ठीक कराना चाहिए बल्कि सूखे पड़े तालाबों में पानी भरवाने की भी व्यवस्था करनी चाहिए।
भीटी के सुरेश कुमार, अजय तिवारी व जगदंबा ने कहा कि तालाबों की खोदाई तो कर दी गई लेकिन उसमें पानी नहीं डलवाया जा सका। साथ ही सरकारी नलकूपों को भी लंबे समय से ठीक नहीं कराया जा सका है। इससे न सिर्फ आमलोगों को भीषण गर्मी में एक-एक बाल्टी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है बल्कि मवेशी भी परेशान हो रहे हैं।