आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मसेना मिर्जापुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन परीक्षित-शुक संवाद, शुकदेव जन्म, कपिल उपदेश सहित प्रमुख प्रसंगों का वर्णन करते हुए प्रवाचक अनिल शास्त्री ने बताया कि कथा जीव को भवसागर से पार कराने वाली नौका है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
कथा के अंतिम दिवस पर प्रवाचक ने राजा परीक्षित के अंतिम समय की कथा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एक बार शिकार के दौरान राजा परीक्षित गहन वन में भटक गए। प्यास लगने पर वे शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। वहां ऋषि समाधि में लीन थे और उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। परीक्षित ने इसे अपना अपमान मान लिया और वहीं पड़ा एक मृत सर्प उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। यह दृश्य शमीक ऋषि के पुत्र ने देखा और क्रोधित होकर जल हाथ में लेकर शाप दे दिया जिसने मेरे पिता का अपमान किया है, वह सातवें दिन तक्षक नामक सर्प के डसने से मृत्यु को प्राप्त होगा।
अनिल शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा न केवल श्रोताओं का कल्याण करती है, बल्कि आयोजकों और सभी सहयोगियों को पुण्य का भागी बनाती है। कथा से हृदय में प्रेम, करुणा, दया, मैत्री और समत्व भाव जागते हैं, जिससे स्वयं परमात्मा प्रसन्न होते हैं। कथा के अंत में विधिवत हवन, पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। महाआरती के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।