अंबेडकरनगर। अहंकार पतन का कारण है। लोगों में अहंकार लेश मात्र भी नहीं होना चाहिए। अहंकारी व्यक्ति को प्रभु का सानिध्य कभी नहीं मिलता। यह बातें अकारीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास पं. तुलसीराम शास्त्री ने श्रोताओं को बताई।
उन्होंने कहा भगवान ने न तो रावण के अहंकार पसंद किया और न ही कंस के अहंकार को। उन्होंने अहंकार से त्रस्त दोनों लोगों का विनाश किया। अगर उनके किसी भक्त को अहंकार आ जाता है, तो उन्हें भी सबक सिखाकर उनके अहंकार को नष्ट करते हैं। धर्म के पथ पर चलने को प्रेरित करते हैं।
कथा प्रसंग में कंस वध, गोपियों के संग रासलीला और भगवान के विवाह के कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। गोपियों की विरह वेदना का वर्णन सुनकर लोगों की आंखें नम हो गई। इस अवसर पर भगवान के रुक्मिणी संग विवाह पर झांकी निकाली गई और महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इस अवसर पर पूरा पंडाल भगवान कृष्ण के भजनों पर झूमे उठ। इस अवसर पर सैकड़ों श्रोता उपस्थित रहे।