अंबेडकरनगर। इब्राहिमपुर के धनुआपुर में शुक्रवार को ईंट-भट्ठे की दीवार ढहने से एक मजदूर गर्म राख और मलबे में दब गया। शोर सुनकर पहुंचे मजदूरों ने काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुका था। आनन-फानन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसको मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
फूलपुर गांव निवासी सुभाष चंद्र (42) कई वर्षाें से धनुआपुर स्थित ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते थे। इन दिनों भट्ठे पर ईंट पकाने के साथ ही निकासी का काम तेजी से चल रहा है। शुक्रवार को ईंटों की ढुलाई की जानी थी। इसलिए सुभाष चंद्र घर से सुबह नौ बजे ही भट्ठे पर पहुंच गए थे। बहंगी ( बांस के डंडे से ईंट की ढुलाई का बना यंत्र) लेकर ईंट की ढुलाई चालू की।
एक चक्कर पूरा करने के बाद दूसरे चक्कर में बहंगी पर ईंट लादकर बाहर आ रहे थे। तभी भट्ठे की दीवार उनके ऊपर गिर गई। इससे वह लड़खड़ाकर गर्म राख में गिर गए और ऊपर से दीवार का मलबा भी आ गिरा। सुभाष की चीख-पुकार सुनकर भट्ठे पर मौजूद मजदूर मौके पर पहुंचे। जब तक सुभाष को मलबे से बाहर निकाला जाता तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे।
परिजन गांव के प्रमोद वर्मा और शाहिद अली के साथ उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा आए। जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। थाना प्रभारी रितेश पांडेय ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
पत्नी व बच्चे हुए बेसहारा
मृतक सुभाष परिवार में अकेला कमाने वाला था। बड़ा बेटा अरुण (18) हाईस्कूल और छोटा बेटा अनीस (14) कक्षा छह में पढ़ रहा है। अचानक पति की मौत की खबर सुन पत्नी किरन बेसुध हो गईं। मृतक के भाई शिवनाथ ने बताया कि तीन भाइयों में सुभाष सबसे छोटे थे। बड़े भाई गप्पू की पूर्व में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। अब छोटा भाई भी उनका साथ छोड़ गया।
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भट्ठों पर सुरक्षा के नहीं कोई इंतजाम
सर्दी-गर्मी में पसीना बहाने वाले ईंट-भट्ठा मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए ईंट-भट्ठों पर कोई इंतजाम नहीं है। नियमत: मजदूरों को धूल-धुंए से बचने के लिए एक अलग ड्रेस, सिर पर प्लास्टिक की टोपी, हाथों में दस्ताने व पैरों में जूते की किट भट्ठा मालिक की तरफ से दी जानी चाहिए, लेकिन यह व्यवस्था किसी भी भट्ठे पर नहीं है।
वर्जन
मामले की जांच कराई जाएगी। यदि मृतक का विभाग में पंजीयन होगा तो विभागीय मदद दिलाई जाएगी।
-राजबहादुर यादव, सहायक श्रम आयुक्त