कटेहरी (अंबेडकरनगर)। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत इस वर्ष 26 अगस्त को रखा जाएगा। यह व्रत भारतीय सनातन परंपरा में सुहागिनों के लिए आस्था का पूरक माना जाता है। हरतालिका तीज व्रत का संकल्प सरगी के बिना अधूरा माना जाता है।
सावन और भाद्रपद मास के विशेष पर्वों में इसकी गणना सर्वोच्च व्रतों में की जाती है। इस दिन शिव-पार्वती के पावन मिलन की स्मृति में महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और मिट्टी से निर्मित शिव-पार्वती की मूर्ति का विधिवत पूजन करती हैं। हरतालिका तीज का व्रत रात्रि जागरण और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण के साथ पूर्ण होता है, लेकिन इसकी शुरुआत सरगी के साथ होती है। सरगी केवल भोजन नहीं, बल्कि व्रत का आध्यात्मिक आरंभ होती है। यह व्रत का पहला और अत्यंत पवित्र चरण होता है, जिसमें व्रती महिला भगवान शिव व माता पार्वती को स्मरण कर व्रत का संकल्प लेती है। आचार्य बाल मुकुंद शास्त्री ने बताया कि तीज की सरगी के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। 26 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:27 बजे से 5:12 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में सरगी ग्रहण कर व्रत का विधिवत आरंभ करना चाहिए। सरगी पूरी तरह सात्विक, ताजगीपूर्ण और संकल्पित आहार होना चाहिए। सरगी में मौसमी फल, मेवा, नारियल पानी, दूध से बनी खीर, शुद्ध देसी घी का हलवा, बिना नमक की मिठाइयां उपयुक्त मानी जाती हैं। यह प्रसाद रूप में लिया जाता है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ व्रत का आधार भी बनता है।