अंबेडकरनगर। खेती से बढ़िया उत्पादन के लिए मिट्टी की जांच बेहद जरूरी होती है, इसका मुख्य उद्देश्य खेत की जरूरत के अनुसार उसे पोषकतत्व उपलब्ध करवाना है, ताकि उत्पादन बेहतर हो सके और निर्धारित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सके। इसके लिए 18 हजार से ज्यादा मिट्टी के नमूने लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले में पांच लाख से अधिक किसान है। फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान विभिन्न प्रकार के रसायनिक खाद व कीटनाशक प्रयोग करते हैं। उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण मिट्टी के पोषणतत्व समाप्त हो रहे हैं। मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे इसके लिए कृषि विभाग लगातार मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करता है। वर्ष 2025-26 में 180 गांव से 18 हजार मिट्टी के नमूने लेकर उसकी गुणवत्ता का लक्ष्य शासन से मिला है। इसके लिए 64 कर्मचारियों को लगाया गया है। इनमें 16 कृषि सखियां भी शामिल हैं।
पौधे के विकास के लिए कुल 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। अधिक पैदावार व लाभ लेने के लिए उर्वरको का संतुलित मात्रा में प्रयोग आवश्यक है। उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने के लिए मिट्टी का परीक्षण करवाना आवश्यक है। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि रवि की फसल में 70 प्रतिशत तथा खरीफ की फसल में 30 प्रतिशत नमूने लेकर मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी।
ऐसे लिया जाता है मिट्टी का नमूना-
मिट्टी का नमूना हमेशा फसल की बुवाई या रोपाई के एक माह पहले लेना चाहिए। जिस खेत का नमूना लेना हो उसके अलग-अलग 8 से 10 स्थानों पर निशान लगाया जाता है। चुनी हुई जगह के ऊपरी सतह से घासफूस हटाकर सतह से 15 सेमी यानि आधा फुट गहरा गड्ढा खोद कर खुरपे से एक तरफ से अंगुली की मोटाई तक का ऊपर से नीचे तक का नमूना काटा जाता है। मिट्टी को बाल्टी या टब में इकट्ठा कर लिया जाता है। अन्य स्थानों से भी नमूने लेकर मिट्टी का मिश्रण किया जाता है। अब इस नमूने (लगभग आधा किलो मिट्टी) को साफ थैली में डाल लें। एक पर्ची पर किसान का नाम, पिता का नाम, गांव, तहसील व जिले का नाम खेत का खसरा नंबर भूमि सिंचित है या असिंचित आदि लिखकर थैली में डालकर जांच के लिए भेजा जाता है।